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रांची में क्यों नष्ट की गई 1.8 लाख लीटर बीयर? वजह जानकर हो जाएंगे हैरान; करोड़ों का हुआ नुकसान

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बीयर को किया गया नष्ट। (जागरण)



राज्य ब्यूरो, रांची। सिर्फ रांची में 1 लाख 80 हजार लीटर बीयर एक्सपायर हो चुके हैं। उनके विनष्टीकरण की कार्रवाई शनिवार से शुरू हो चुकी है। झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के रांची के नगड़ी स्थित गोदाम में ये बीयर पड़े थे, जिन्हें नष्ट किया जा रहा है।

नष्ट हो रहे बीयर केन वाले हैं। पहले दिन जेएसबीसीएल ने 5700 पेटी बीयर को नष्ट किया। एक पेटी में 12 लीटर बीयर रहता है। यानी पहले दिन कुल 68 हजार 400 लीटर बीयर को नष्ट किया गया है।

गोदाम में एक्सपायरी बीयर 15000 पेटी हैं, यानी एक लाख 80 हजार लीटर बीयर एक्सपायरी हैं, जिन्हें नष्ट किया जा रहा है। औसतन बीयर की कीमत अगर 300 रुपये लीटर रखा जाय तो करीब पांच करोड़ 40 लाख रुपये मूल्य के बीयर को रांची में नष्ट किया गया है।

बीयर के एक्सपायरी का मामला सिर्फ रांची का ही नहीं है। सभी जिलों में यह समस्या है। इसमें न तो नुकसान जेएसबीसीएल का हो रहा है और न हीं खुदरा शराब दुकानदारों का। अगर किसी को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है तो वह बीयर आपूर्ति कंपनियों का हो रहा है।

आरोप है कि उक्त कंपनियों ने बिना बेहतर प्रबंधन के बीयर की मांग से अधिक आपूर्ति की, जिसके चलते उनके बीयर एक्सपायरी हो गए। जिन ब्रांड के बीयर सर्वाधिक एक्सपायर हुए हैं, उनमें कंगारू, किंगफिशर अल्ट्रा लेजर, प्रूस्ट व हंटर ब्रांड वाले सर्वाधिक हैं।
विधिवत निगरानी नहीं होने व नीति दुरुस्त नहीं होने से हुए एक्सपायर : संघ

झारखंड शराब व्यापारी संघ ने बीयर के एक्सपायरी होने के पीछे विधिवत निगरानी व नीति का दुरुस्त नहीं होना बताया जा रहा है। इसके लिए संघ ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री, उत्पाद सचिव को कुछ सुझाव दिया है, ताकि नुकसान को रोका या कम से कम किया जा सके।

जारी सुझाव के अनुसार एक्सपायरी तिथि से 60 दिन पहले संबंधित स्टाक का डिजिटल अलर्ट जारी किया जाय। एक्सपायरी तिथि से 30 दिन पहले ऐसे स्टाक को अधिकतम 50 प्रतिशत छूअ पर बिक्री की विशेष अनुमति दी जाय। यह बिक्री केवल लाइसेंसधारी होटल, ढाबा, बार या वैध लाइसेंसी दुकानों को सीमित मात्रा में की जाय।

जेएसबीसीएल गोदाम के स्तर पर फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट (फिफो) प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाय, ताकि पुराना स्टाक पहले निकले। जिला स्तर पर एक्सपायरी स्टाक के लिए विशेष ट्रांसफर या समायोजन की सुविधा दी जाय।
निर्माण के तीन से छह महीने के भीतर ही पीने योग्य रहती है बीयर

बीयर निर्माण के तीन से छह महीने के भीतर पीने योग्य रहती है। इसके बाद इसे एक्सपायर माना जाता है। बीयर का रख-रखाव ठीक से न हो तो इससे पहले भी वह खराब हो जाती है। बोतल, केन में मौजूद थोड़ी आक्सीजन या सील खराब होने पर हवा अंदर जाने से बीयर का स्वाद खराब हो जाता है।

धूप या यूवी किरणों के संपर्क में आने से बीयर में मौजूद यौगिक टूटते हैं, जिससे दुर्गंधयुक्त स्वाद आता है। उच्च तापमान रसायनिक प्रक्रियाओं को तेज करता है, जिससे बीयर बासी हो जाती है।

यह भी पढ़ें- झारखंड शराब घोटाला: फर्जी बैंक गारंटी पर 75 लाख की डील, एसीबी जांच में कई खुलासे
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