इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन के पास अन्ना नगर से गुजर रहे नाले में कूड़े को रोकने के लिए लगाया गया ट्रैश बूम बैरियर। जागरण
स्टेट ब्यूरो, नई दिल्ली। प्लास्टिक और दूसरा कचरा नालों के ज़रिए सीधे यमुना में बह रहा है। ज़्यादातर नालों से नदी में तय स्टैंडर्ड से ज़्यादा प्लास्टिक कचरा गिर रहा है। दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी (DPCC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 27 बड़े नालों में से 24 में बहुत ज़्यादा कचरा है।
इससे यमुना में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है। नदी को साफ़ करने के लिए इन समस्याओं का हल निकालना जरूरी है। कचरे को रोकने के लिए ट्रैश बूम बैरियर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गियों से निकलने वाला सीवेज और कचरा ज़्यादातर नालों में बहता है। कई जगहों पर प्लास्टिक और दूसरा ठोस कचरा भी सीधे नालों में डाला जाता है। इसी तरह, कंस्ट्रक्शन साइट से निकलने वाली गाद, मलबा और इंडस्ट्रियल कचरा भी नालों में डाला जा रहा है।
इससे यमुना गंदी होती है और पानी भर जाता है। नालों में ठोस कचरे की गंभीर समस्या का खुलासा दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी (DPCC) की दिसंबर की 27 नालों पर आई रिपोर्ट में भी हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक लीटर पानी में टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (TSS) की ज्यादा से ज्यादा मात्रा 100 मिलीग्राम से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। सिर्फ नजफगढ़, मेहरानी बाग और अबुल फजल नाले ही इस स्टैंडर्ड को पूरा करते हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि नदी में बहने वाले नालों पर फ़्लोटिंग ट्रैश बूम बैरियर लगाए जा रहे हैं। इसका मकसद नालों से बहने वाले प्लास्टिक, बोतलें, थर्मोकोल और दूसरे ठोस कचरे को यमुना नदी तक पहुंचने से रोकना है।
ऐसे बैरियर नजफगढ़ ड्रेन, शाहदरा ड्रेन, सेन नर्सिंग होम ड्रेन, ड्रेन नंबर 14, सिविल मिलिट्री ड्रेन, बारापुला ड्रेन, सुनहरी और कुशक ड्रेन, तैमूर ड्रेन, तुगलकाबाद ड्रेन, मैगजीन ड्रेन और ख़ैबर पास जैसे बड़े नालों पर लगाए गए हैं।
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