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महाशिवरात्रि 2026: वेद व‍िद्यापीठ गुरुधाम के ज्योतिर्विद् आचार्य निरंजनानंद बोले – चारों प्रहर करें पूजा, जानिए रुद्राभिषेक व शृंगार का क्या है महत्व?

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Mahashivratri 2026: ज्योतिर्विद् आचार्य निरंजनानंद जी महाराज बता रहे कैसे करें पूजा।  



ड‍िज‍िटल डेस्‍क, भागलपुर। महाशिवरात्रि 2026 : गुरुधाम श्री श्यामाचरण वेद प्रतिष्ठान बौंसी बांका के ज्योतिर्विद् आचार्य निरंजनानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को शिव और पार्वती पर‍िवार की आराधना एवं पूजा आयोजित की जाएगी। आचार्य जी ने भक्तों को पूजा-विधि और जागरण के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें बताई है। चारों प्रहर रुद्राभिषेक और श्रृंगार की विधि, जागरण, पंचामृत अभिषेक, पुष्प, धूप, दीप, और वर यात्रा की विस्तृत जानकारी आचार्य निरंजनानंद जी ने भक्तों के लिए साझा की है। श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करें।  
महाशिवरात्रि पूजन का समय

महाशिवरात्रि पूजा मुख्यतः चारों प्रहरों में सम्पन्न होती है:

  

  • पहला प्रहर: 6 से 9 बजे
  • दूसरा प्रहर: 9 से 12 बजे
  • तीसरा प्रहर: 12 से 3 बजे
  • चौथा प्रहर: 3 से 6 बजे


  

चारों प्रहरों में शिव का रुद्राभिषेक और माता पार्वती का श्रृंगार किया जाता है।
पूजा विधि

आचार्य जी ने बताया कि भक्त इस प्रकार से पूजा कर सकते हैं:

  

स्नान एवं अभिषेक:

  

  

  • जल से स्नान


  

  

  • दूध से स्नान, पुनः जल


  

  

  • दही, गुड़, घी, मधु, पंचामृत


  

  

  • तेल एवं सुगंधित जल से स्नान


  

  

  • वस्त्र या मौली का प्रयोग


  

  

श्रृंगार एवं सामग्री:

  

  

  • त्रिपुंड, चंदन (पीला/उजला/दोनों), लाल चंदन


  

  

  • चावल, दूर्वा, बिल्वपत्र


  

  

  • पुष्प, पुष्पमाला, अंक या धतूरा फूल


  

  

  • धतूरा फल, भांग


  

  

  • धूप, दीप, नैवेद्य और द्रव्य


  

  

  • पुष्पांजलि, अर्ध त्रिपेकन, साष्टांग प्रणाम


  

  

  • प्रार्थना


  
शिवरात्रि जागरण और व्रत


  • महाशिवरात्रि में जागरण प्रधान होता है।

  • चारों प्रहर पूजा में जागरण भी किया जाता है।

विशेष निर्देश


  • पूजन के पश्चात वर यात्रा निकाली जा सकती है।

  • रात्रि में यजमान विवाह करने से बचें; यदि विवाह का हवन हो तो केवल घी से हवन करें।

  • सात फेरा करने पर केवल शिव-पार्वती के फोटो रखकर विधि पूरी करना उचित है।


ज्योतिर्विद् आचार्य निरंजनानंद जी महाराज ने भक्तों से अपील की है कि 15 फरवरी को श्रद्धा और भक्ति भाव से शिव-पार्वती पूजन करें, ताकि शिव और पार्वती की कृपा हमेशा बनी रहे।
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