सांकेतिक तस्वीर।
विजय जोशी, देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून नामी बदमाश, गैंग्स्टर और हिस्ट्रीशीटर के संगीन वारदातों के बाद छिपने के लिए शरणस्थली बन चुकी है।
हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर इस धारणा को मजबूत किया है कि अपराधियों के लिए दून एक \“सेफ हाइडआउट\“ बनता जा रहा है।
देहरादून में पिछले वर्षों में भी कई दुर्दांत अपराधी गुमनाम जीवन जीते मिले तो आम शहरी से लेकर दूर पुलिस के भी पैरों तले जमीन खिसक गई। गैंगस्टर विक्रम शर्मा भी दून की पाश कालोनी में वर्षों से रह रहा था और किसी को इसकी भनक भी नहीं थी।
शुक्रवार को झारखंड के कुख्यात गैंग्स्टर विक्रम शर्मा की देहरादून में गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पर्दाफाश हुआ कि वह पिछले करीब 10 वर्षों से परिवार के साथ दून में रह रहा था।
स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान एक कारोबारी के रूप में थी और उसके आपराधिक अतीत की भनक बहुत कम लोगों को थी।
इस हत्याकांड ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए क्या देहरादून बाहरी राज्यों के अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है? क्या स्थानीय तंत्र को उनकी मौजूदगी की जानकारी नहीं होती, या वे फर्जी पहचान और शांत जीवनशैली की आड़ में आसानी से घुल-मिल जाते हैं?
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और झारखंड के कई हिस्ट्रीशीटर अपराधी पूर्व में देहरादून में किराये के मकानों या होटलों में छिपे पाए गए। कुछ मामलों में पुलिस ने वांछित अपराधियों को दून से गिरफ्तार कर संबंधित राज्यों को सौंपा।
प्रापर्टी निवेश, होटल व्यवसाय या छोटे व्यापार की आड़ में कई बाहरी तत्व लंबे समय तक यहां टिके रहे। गैंगवार या ठेकेदारी विवाद में शामिल कुछ अपराधियों ने भी वारदात के बाद दून का रुख किया।
बढ़ती चिंता, प्रशासन के लिए चुनौती
विक्रम शर्मा प्रकरण के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पुलिस सत्यापन नहीं कर रही है। किरायेदार सत्यापन, होटल रिकार्ड और आपराधिक डाटाबेस के समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
देहरादून पुलिस का दावा है कि समय-समय पर बाहरी अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाते हैं और कई वांछित बदमाशों को गिरफ्तार भी किया गया है। लेकिन, हालिया घटनाओं ने स्पष्ट किया है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
देहरादून में पकड़े गए प्रमुख कुख्यात अपराधी
- हरसिमरनदीप सिंह उर्फ सिम्मा: वर्ष 2018 में पंजाब और हरियाणा के कई हत्या, वसूली और डकैती मामलों में वांछित गैंगस्टर को देहरादून के कैंट क्षेत्र से पुलिस और पंजाब पुलिस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ तीन साथियों से हथियार भी बरामद किए गए।
- अनिल पहलवान: वर्ष 2020 में दिल्ली और हरियाणा के 10 से अधिक हत्या और फिरौती के मामलों में वांछित अपराधी को देहरादून पुलिस ने दून विहार क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। वह दो साल से छिपा था और फर्जी पहचान से रह रहा था।
- धर्मेंद्र किर्थल: वर्ष 2021: उत्तर प्रदेश के 53 से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित अपराधी को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने देहरादून के सहस्रधारा रोड से गिरफ्तार किया था। वह बागपत में हत्या मामले में फरार था।
- समर्थ पंवार और संजय नेगी: 2025 में चीनू पंडित गैंग से जुड़े दो गैंगस्टर को देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र से एसटीएफ ने हथियारों के साथ गिरफ्तार किया। इनके पास तीन पिस्टल और कई कारतूस बरामद हुए।
- कुंदन कुमार उर्फ भगत: वर्ष 2025 में देहरादून में नवंबर 2023 को हुई 14 करोड़ की ज्वेलरी शाप डकैती का मुख्य आरोपित, जो बिहार के मुजफ्फरपुर से फरार था, को बिहार एसटीएफ ने पटना में गिरफ्तार किया।
गिरोह भी बनाते रहे हैं दून को शरणस्थली
- देहरादून में वाहन चोरी गिरोह का सदस्य वर्ष 2024: उत्तर प्रदेश के हरदोई का युवक अनुभव त्रिपाठी देहरादून में वाहन चोरी गिरोह के सदस्य के रूप में पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ। जो कि यहां छिपकर रह रहा था।
- भूमि/जमीन स्कैम में गिरफ्तार गिरोह वर्ष 2025: नीरज शर्मा, आशु शर्मा और ज्योति पंवार जैसे आरोपितों को देहरादून में भूमि धोखाधड़ी और स्कैम में गिरफ्तार किया गया था।
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