आईजीआईएमएस का 43वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। (जागरण)
जागरण संवाददाता, पटना। आईजीआईएमएस में एक ओर रोबोटिक फिजियोथेरेपी से पुनर्वास को नई रफ्तार मिली है तो दूसरी ओर इसी माह सिमुलेशन लैब, स्किल लैब और जनरल सर्जरी, यूरोलाजी, हृदय, न्यूरो, हड्डी, कैंसर आदि रोगों की रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की तैयारी है।
सिमुलेशन व स्किल लैब से डॉक्टर व छात्र मरीजों के इलाज के पहले कृत्रिम मॉडल पर जटिल प्रक्रियाओं का अभ्यास कर त्रुटि की आशंका कम सकेंगे। वहीं, रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन अधिक सटीक, कम रक्तस्राव के साथ मरीज जल्द स्वस्थ होकर घर जा सकेंगे।
रोबोटिक फिजियोथेरेपी सिस्टम शुरू होने के बाद लकवा, स्ट्रोक या स्पाइन चोट के मरीजों का पुनर्वास अधिक गुणवत्तापूर्ण हो गया है। नई तकनीकों से मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी व आधुनिक उपचार मिल रहा है।
ये बातें आईजीआईएमएस के 43वें स्थापना दिवस समारोह में 43 वर्षों की उपलब्धियों व भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए निदेशक प्रो. डॉ. बिन्दे कुमार ने कहीं।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि पटना एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, प्रो. डॉ. बिन्दे कुमार, उपनिदेशक सह आरआइओ के चीफ प्रो. डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा, डीन प्रो. डॉ. ओम कुमार, एम्स पटना के प्रो. डॉ. अमरेश कृष्णा, पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. मनीष राठी ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
संचालन आयोजन समिति की सचिव डॉ. संगीता पंकज ने किया। इस मौके पर कॉलेज मैगजीन का विमोचन करने के साथ 60 स्टालों की स्वास्थ्य प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
इसमें आमजन को रोगों की रोकथाम व शुरुआती पहचान के बारे में जानकारी दी गई। मौके पर डॉ. प्रो. उदय कुमार, प्रो. डॉ. पीके झा, डॉ. निखिल रंजन चौधरी, डॉ. मनोज कुमार चौधरी, प्रो. डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. वर्षा सिंह, डॉ. प्रीतपाल सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विनय कुमार पांडेय, डॉ. रत्नेश चौधरी, लाल पैथ के डॉ. देवेंद्र प्रसाद आदि सक्रिय भूमिका में रहे।
संवेदना और शोध से ही चिकित्सा में उत्कृष्टता
प्रो. (ब्रिगेडियर) डा. राजू अग्रवाल ने कहा कि सफल डॉक्टर की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना है। मरीज बीमारी भूल सकता है लेकिन डाक्टर का व्यवहार नहीं भूलता।
उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे शोध पर विशेष ध्यान दें ताकि गंभीर बीमारियों का सस्ता और सुलभ इलाज विकसित किया जा सके। इसमें एम्स पटना हर तरह का सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने हाल के वर्षों में आइजीआइएमएस की उपलब्धियों का हवाला देते हुए कहा कि आज यह प्रदेश में रोगियों के विश्वास का केंद्र बन चुका है।
बार-बार सूजन हो तो रहें सतर्क, ल्यूपस किडनी को तेजी से पहुंचाता नुकसान
अगर आपके शरीर के किसी भी हिस्से में बार-बार सूजन आ रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। यह ल्यूपस जैसी गंभीर आटो इम्यून बीमारी का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान नहीं होने पर यह तेजी से किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
ये बातें स्थापना दिवस समारोह में सिस्टेमिक ल्यूपस नेफ्राइटिस पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता चंडीगढ़ पीजीआईएमईआर के नेफ्रोलाजिस्ट प्रो. डॉ. मनीष राठी ने दी। उन्होंने बताया कि ल्यूपस रोग में शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र अपने ही अंगों पर हमला करने लगते हैं।
यह बीमारी युवा महिलाओं में अधिक पाई जाती है। कई मामलों में सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमाटोसस (एसएलई) किडनी को एक दिन से एक सप्ताह के भीतर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। ऐसे में सूजन, पेशाब में झाग, अत्यधिक थकान या चेहरे पर सूजन जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डाक्टर से परामर्श लें।
प्रो. राठी ने बताया कि एसएलई से डैमेज किडनी के इलाज की नई पद्धति से उपचार लागत 90 प्रतिशत तक कम हुई है। पहले मरीजों को माइकोफेनोलेट मोफेटिल दी जाती थी जबकि अब साइक्लोफास्फामाइड कम डोज में देकर बेहतर इम्यूनो सप्रेसिव थेरेपी दी जा रही है।
इस पद्धति से साइड इफेक्ट कम हुए और परिणाम अधिक प्रभावी रहे। समय पर निदान व व्यक्तिगत उपचार योजना से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
पटना एम्स के किडनी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अमरेश कृष्णा ने बताया कि किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ओपीडी में आने वाले आधे से अधिक मरीजों में बीपी और मधुमेह अनियंत्रित मिलता है। डायलिसिस कराने वाले लगभग 50 प्रतिशत मरीज मधुमेह से पीड़ित हैं।
उन्होंने आगाह किया कि शुगर का बढ़ना सीधे किडनी को प्रभावित करता है और क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ाता है। |