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कांगड़ा जिले में 118 ब्लैक स्पाट्स चिह्नित, 93 प्रतिशत दुर्घटनाओं की वजह हैं ये 5 कारण, हाईवे पर कितने हादसे?

LHC0088 2026-1-7 16:26:37 views 890
  

जिला कांगड़ा में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में उपस्थित अधिकारी।  



संवाद सहयोगी, धर्मशाला। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत उपायुक्त कार्यालय स्थित एनआइसी सभागार में जिलास्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों की संख्या को कम करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों, ब्लैक स्पाट्स की पहचान, जन-जागरूकता अभियानों, राहत एवं बचाव व्यवस्था तथा राह-वीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।
93 प्रतिशत हादसों की वजह

एडीसी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण मानवीय भूल, ओवर-स्पीडिंग, नशे की हालत में वाहन चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग तथा यातायात नियमों की अनदेखी है। लगभग 93 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं इन्हीं कारणों से हो रही हैं, जबकि 45 से 50 प्रतिशत दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर घटित हो रही हैं।
118 ब्लैक स्पॉट

जिले में अब तक 118 ब्लैक स्पाट्स चिंहित किए जा चुके हैं। इनकी पहचान, नियमित मानिटरिंग और सुधार के लिए उप-मंडल स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, जिनमें पुलिस और लोक निर्माण विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी चिन्हित ब्लैक स्पाट्स पर शीघ्र एवं प्रभावी सुधारात्मक कार्य किए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
घायल को बचाने वाले को किया जाएगा सम्मानित

वहीं राह-वीर योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले नागरिक को सम्मानित किया जाता है। राह-वीर को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी सम्मानित किया जाएगा, जिससे समाज में मानवता और सहायता की भावना को बढ़ावा मिलेगा।  
25 हजार रुपये पुरस्कार

इस योजना के अंतर्गत सहायता करने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाता है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर चयनित राह-वीर को एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। सड़क सुरक्षा के लिए जन-जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एनजीओ के माध्यम से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे तथा स्कूलों, कालेजों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
ड्राइवरों की आई-टेस्टिंग जरूरी

ड्राइवरों की आई-टेस्टिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी चालक की अस्वस्थता दुर्घटना का कारण बन सकती है। विशेष रूप से स्कूल बस चालकों की नियमित नेत्र जांच सुनिश्चित की जाए। जिले में विभिन्न स्कूलों में कुल 1784 स्कूल बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे यात्रा करते हैं। यातायात नियमों के पालन को सख्ती से लागू किया जाएगा। अस्पतालों और स्कूलों के आसपास सुरक्षित पैदल क्रासिंग विकसित की जाएंगी, ताकि बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजिंदर जरियाल, एसडीएम मोहित रत्न, संयुक्त आयुक्त शहरी विकास सुरेंद्र कटोच के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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