संवाद सूत्र, लखीसराय। शिक्षा विभाग के डीपीओ स्थापना कार्यालय में पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। यहां शिक्षकों को एक ही आरोप में पहले निलंबित किया जाता है, फिर निलंबन मुक्त कर कुछ ही समय बाद उसी आरोप में दोबारा निलंबित कर दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला कजरा शिक्षांचल अंतर्गत उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय महेशपुर के शिक्षक रणधीर कुमार के साथ सामने आया है।
तत्कालीन डीपीओ स्थापना संजय कुमार ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कजरा के जांच प्रतिवेदन के आधार पर शिक्षक रणधीर कुमार को 9 अप्रैल 2025 को निलंबित किया था। जांच प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया था कि शिक्षक रणधीर कुमार ने स्थानीय असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर विद्यालय की शिक्षिकाओं अनुप्रिया, श्वेता एवं अन्य शिक्षकों के साथ गाली-गलौज की और जान मारने की धमकी दी।
हालांकि, बाद में तत्कालीन डीपीओ संजय कुमार ने शिक्षक को आचरण एवं व्यवहार में शालीनता बनाए रखने, विनम्रता स्थापित करने तथा विद्यालय संचालन में सहयोग करने की शर्त पर निलंबन से मुक्त कर दिया था। इसके कुछ समय बाद डीपीओ का तबादला हो गया। उनके स्थान पर पदभार संभालने वाली प्रभारी डीपीओ दीप्ति ने उसी पुराने आरोप के आधार पर 21 जून 2025 को मात्र एक माह के भीतर शिक्षक रणधीर कुमार को पुनः निलंबित कर दिया।
निलंबित शिक्षक रणधीर कुमार ने बताया कि विद्यालय की कुछ शिक्षिकाओं द्वारा उनके खिलाफ जिला शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ स्थापना में शिकायत की गई थी, जिसके आलोक में कजरा के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने जांच प्रतिवेदन दिया। उसी प्रतिवेदन के आधार पर पहले उन्हें निलंबित किया गया, फिर मुक्त किया गया और अब दोबारा उसी आरोप में निलंबन झेलना पड़ रहा है।
लंबे समय से निलंबन मुक्त नहीं होने के कारण वे न्याय के लिए विभागीय कार्यालयों का चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं और अब न्यायालय की शरण लेने को विवश हैं।
इस पूरे मामले को लेकर प्राथमिक नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ (मूल इकाई) लखीसराय के जिलाध्यक्ष बबलू कुमार ने कहा कि डीपीओ स्थापना ने जिले के विभिन्न विद्यालयों के आधा दर्जन से अधिक शिक्षकों को मामूली आरोपों में लगभग दस माह से निलंबित कर रखा है।
निलंबन के कारण शिक्षकों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है और कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि मामले की अपने स्तर से जांच कराई जाएगी। जांचोपरांत जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर विभागीय स्तर पर उचित कार्रवाई की जाएगी। |
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