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8 अक्टूबर से शुरू हो रहा पवित्र कार्तिक मास, दीपावली और छठ सहित मनाए जाएंगे कई प्रमुख व्रत-त्योहार

LHC0088 2025-10-7 22:06:30 views 1259
  8 अक्टूबर से शुरू हो रहा पवित्र कार्तिक मास, दीपावली और छठ सहित मनाए जाएंगे कई प्रमुख व्रत-त्योहार





संवाद सूत्र, बगहा। सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पवित्र कार्तिक मास बुधवार आठ अक्टूबर से आरंभ हो रहा है। यह महीना तुलसी पूजन से शुरू होकर देव दीपावली तक चलता है और इस दौरान अनेक धार्मिक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आचार्य राजीव कुमार मिश्र के अनुसार, इस माह में महिलाएं प्रातःकाल जागकर घर की साफ-सफाई के बाद पौ फटने से पूर्व तुलसी पूजन कर दीपदान करती हैं। वहीं, संध्या में गोधूलि बेला में पुनः स्नान कर तुलसी पूजन व दीपदान के बाद ही अन्य कार्य करती हैं।



इस मास में खानपान व आचार-विचार में संयम रखने का विशेष महत्व है। कार्तिक मास का तीसरा दिन 10 अक्टूबर को करवा चौथ (संकष्टी श्रीगणेश करक चतुर्थी) के रूप में मनाया जाएगा।

इस दिन सुहागिनें निर्जला उपवास रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही जल ग्रहण करती हैं। 11 अक्टूबर को कार्तिक कृष्ण पंचमी व्रत, 13 अक्टूबर को अहोई अष्टमी, 14 अक्टूबर को राधा अष्टमी व्रत तथा 17 अक्टूबर को रंभा एकादशी व्रत किया जाएगा।



18 अक्टूबर को धनतेरस, शनि प्रदोष व्रत एवं लक्ष्मी-गणेश पूजन शुभ मुहूर्त में किया जाएगा। इस दिन कुंभ लग्न में दोपहर 2:21 से 4 बजे तक, रात्रि 7 से 9 बजे तक वृष लग्न में तथा रात्रि 1:27 से 3:41 तक सिंह लग्न में विशेष पूजन का विधान है।

19 अक्टूबर को मासिक शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी व हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 20 अक्टूबर को दीपावली के दिन पांच पूजा मुहूर्त होंगे, जिनमें पहली पूजा कुंभ लग्न में 2:32 से 4:51 तक होगी और आखिरी पूजा सिंह लग्न में रात्रि 1:15 से 3:30 तक होगी।





21 अक्टूबर को सोमवती अमावस्या का व्रत किया जाएगा। 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा, जबकि 23 अक्टूबर को भाई दूज, यम द्वितीया, यमुना स्नान व चित्रगुप्त पूजा की जाएगी।

25 अक्टूबर को छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होगी। 26 को खरना, 27 को संध्या अर्घ्य और कोशी पूजन तथा 28 को प्रातः अर्घ्य के साथ व्रत का पारण होगा।



30 अक्टूबर को अक्षय नवमी के दिन आंवला वृक्ष की पूजा एवं भोजन करने की परंपरा है। इसके बाद एक नवंबर को देवउठान एकादशी, तुलसी विवाह, तीन को सोम प्रदोष, चार को बैकुंठ चतुर्दशी व अंत में पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन गंगा स्नान व चंद्रमा को अर्घ्य देकर मास का समापन होता है।
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