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फाइलों में दौड़ रहा धान, जमीन पर किसान परेशान: आखिर कहां गया 19 करोड़ का भुगतान?

Chikheang 2025-12-28 06:25:53 views 825
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। धान खरीद के मौजूदा सीजन में मुरादाबाद जनपद में सरकारी खरीद की तस्वीर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक ओर सहकारिता विभाग से जुड़ी एजेंसियों पर बोरे की किल्लत हैं, उन्हें फोर्टिफाइड चावल(एफआरके) के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर खाद्य एवं रसद विभाग ने कागजों में 80 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का दावा कर दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कांठ उप मंडी स्थित खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर अब तक लगभग 46 हजार क्विंटल धान की खरीद दर्शाई जा चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत किसानों के लिए राहत से कोसों दूर है। यही हाल खाद्य विभाग के अन्य केंद्रों का है। ठाकुरद्वारा मंडी क्षेत्र से जुड़े किसानों का कहना है कि पंजीकरण के बाद भी उन्हें न तो समय से तौल मिल रही है और न ही भुगतान का भरोसा।

बड़ी समस्या यह है कि मंडी से जुड़े कई क्रय केंद्रों पर जिन किसानों से धान की खरीद दिखाई जा रही है, उनका आनलाइन पता ही नहीं दर्शाया जा रहा है। किसी का पता आर, किसी का ओके, किसी का डबल जीरो दर्ज कर लिया है। इससे सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया ठप पड़ी है।

किसानों का आरोप है कि मिसमैच और पता अपडेट नहीं जैसे बहाने बनाकर वास्तविक किसानों को खरीद से बाहर किया जा रहा है, जबकि कागजों में भारी मात्रा में धान की खरीद दर्ज की जा रही है। तराई किसान यूनियन के नेता मोहम्मद खालिद ने आरोप लगाया कि कई केंद्रों पर वास्तविक तौल के बजाय कृत्रिम खरीद की जा रही है।

उनका कहना है कि मार्केटिंग इंस्पेक्टर विपिन श्रीवास्तव, राघवेंद्र कुमार, भगवत स्वरूप, समरपाल, बफर गोदाम से जुड़े दीपक कुमार और आलोक रंजन के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आ रही हैं। खालिद का कहना है कि खरीद कागजों में हो रही है, किसान मंडी में भटक रहा है।

नौशेना शेखूपुर के किसान शमीम अहमद ने बताया कि क्रय केंद्रों पर जिन किसानों के नाम पर खरीद दिखाई जा रही है, उनमें से एक तिहाई से अधिक का पता आनलाइन सिस्टम में दर्ज ही नहीं है। धान खरीद की जांच हो जाए तो सारी हकीकत सामने आ जाएगी। खाद्य एवं रसद विभाग, उत्तर प्रदेश के खरीद सारांश के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जनपद मुरादाबाद में खाद्य विभाग ने अब तक 9222 किसानों से 55,455.65 टन धान की खरीद दर्शाई है।

इसके सापेक्ष 132.48 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान आंकड़ों में दिखाया गया है। दैनिक खरीद के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई दिनों में 1400 से 1500 टन से अधिक की खरीद दर्ज की गई है, जबकि किसान संगठनों का दावा है कि उन दिनों मंडियों में इतनी आवक ही नहीं थी। यह विरोधाभास पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
सहकारिता की एजेंसियों की हालत सबसे खराब

किसान नेताओं का कहना है कि सहकारिता विभाग से जुड़ी एजेंसियों पीसीयू, पीसीएफ के केंद्रों पर हालात और भी बदतर हैं। बोरे न होने के कारण कई केंद्रों पर खरीद पूरी तरह ठप पड़ी है। किसान ट्राली लेकर केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन बोरा न मिलने के कारण उन्हें बिना तौल कराए वापस लौटना पड़ रहा है।

यूपीएसएस पर भी गंभीर आरोप हैं। किसानों और आढ़तियों का कहना है कि यूपीएसएस ने लक्ष्य से अधिक धान की खरीद केवल कागजों में करा ली है, जबकि धान और चावल के प्रेषण में एजेंसी फिसड्डी साबित हो रही है। गोदामों और मिलों तक धान न पहुंचने से पूरे खरीद चक्र पर संदेह गहरा गया है। आनलाइन पते की गड़बड़ी के चलते किसानों को यह भी आशंका है कि कहीं भुगतान अटक न जाए।

  


धान खरीद पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से की जा रही है। कुछ केंद्रों पर तकनीकी कारणों से आनलाइन पते से जुड़ी दिक्कत आई है, जिसे ठीक कराया जा रहा है। बोरे की उपलब्धता बढ़ाने और भुगतान में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं अनियमितता पाई गई तो कार्रवाई होगी।

- दुर्गेश प्रसाद, संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी, मुरादाबाद




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