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केरल में बड़ा उलटफेर, कांग्रेस के चुने हुए सदस्यों ने भाजपा से मिलाया हाथ

LHC0088 2025-12-27 22:57:39 views 814
  

केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केरल के त्रिशूर जिले की मट्टाथुर पंचायत में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस के सभी आठ चुने हुए सदस्यों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया और काउंसिल पर कंट्रोल करने के लिए भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कांग्रेस के बागी टेसी जोस कल्लरक्कल अब भाजपा के समर्थन से एक नए बने फ्रंट के मुखिया बनकर नए पंचायत अध्यक्ष बन गए हैं, जिससे मट्टाथुर में लेफ्ट का 23 साल का शासन खत्म हो गया है।
अध्यक्ष चुनने के लिए लॉटरी निकालने पर किया जा रहा था विचार

24-सदस्यीय पंचायत के नतीजों कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को 10, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को 8, NDA को 4 और 2 निर्दलीय उम्मीदवार जीते। दोनों पक्षों के बीच मुकाबला कड़ा था, इसलिए प्रेसिडेंट चुनने के लिए लॉटरी निकालने पर भी विचार किया जा रहा था।

यूडीएफ ने केआर ओसेफ को सपोर्ट करने का फैसला किया था, जो एक निर्दलीय उम्मीदवार थे और कांग्रेस के बागी के तौर पर जीते थे। लेकिन पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से ठीक पहले ओसेफ एलडीएफ में शामिल हो गए, जिससे कांग्रेस नेता हैरान रह गए।
कांग्रेस के 8 सदस्यों ने छोटी पार्टी

इससे नाराज होकर कांग्रेस के सभी आठ सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व ने नाइंसाफी की है और वफादार कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया है। पार्टी छोड़ने के बाद, उन्होंने टेसी जोस को आजाद उम्मीदवार के तौर पर सपोर्ट करने का फैसला किया। भाजपा ने भी उन्हें तीन वोटों से सपोर्ट किया (भाजपा का एक वोट अमान्य था) और वह 12 सदस्यों के समर्थन से जीत गईं।
इसकी किसी को नहीं थी उम्मीद

इस्तीफा देने वाले पार्षदों में मिनिमोल, श्रीजा, सुमा एंटनी, अक्षय संतोष, प्रिंटो पल्लीपरंबन, सीजी राजेश, सीबी पॉलोज और नूरजहां नवाज शामिल हैं। इस स्थिति ने कांग्रेस और लेफ्ट दोनों को चौंका दिया है और भाजपा की मदद से कांग्रेस के बागी का अध्यक्ष बनना एक नया राजनीतिक गठबंधन बन गया है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।

अब तक कांग्रेस ने इस्तीफा देने वाले आठ सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है और भाजपा ने सिर्फ इतना कहा है कि यह फैसला “परिषद के जनादेश का सम्मान करता है“।

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