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गोरखपुर में फर्जी एजेंट, नकली वीजा, झूठे ऑफर लेटर से चल रहा ठगी का धंधा

deltin33 2025-12-21 16:07:13 views 918
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने का खेल गली-गली में चल रहा है। पुलिस ने शिकंजा कसने के लिए ईगल सेल बनाई, कई गिरोहों का पर्दाफाश भी हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ठगी का नेटवर्क जस का तस बना हुआ है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस पूरे खेल का केंद्र गोरखपुर बना हुआ है,जहां हर वर्ष आसपास के जिलों देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती से सैकड़ों युवा रोजगार की चाह में पहुंचते हैं और ठगी का शिकार होकर लौटते हैं।

जांच में सामने आ रहा है कि ठगों ने काम करने का तरीका बदल लिया है। पहले कूड़ाघाट,मोहद्दीपुर,सिंघड़िया क्षेत्र में एक-दो बड़े सेंटर बनाकर खुलेआम ठगी होती थी। अब छोटे-छोटे दफ्तर, किराये के कमरे, अस्थायी पते और इंटरनेट मीडिया के जरिए ‘क्लोज्ड नेटवर्क’ खड़ा किया गया है ।वाट्सएप, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर ग्रुप बनते हैं, जहां विदेशों में नौकरी, स्टडी वीजा, स्किल टेस्ट और फास्ट ट्रैक प्रोसेस का लालच दिया जाता है।

शुरुआती बातचीत भरोसा बनाने के लिए होती है,कभी असली फ्लाइट की तस्वीर, कभी पुराने यात्रियों के फर्जी वीडियो, तो कभी नकली आफर लेटर और वीजा की स्कैन कापी भेज दी जाती है। शहर इसलिए हब बन रहा है क्योंकि यहां कोचिंग, ट्रेनिंग सेंटर, ट्रैवल एजेंसी और कंसल्टेंसी की आड़ में काम करना आसान है।

ठगों के पास स्थानीय ‘फैसिलिटेटर’ होते हैं, जो पीड़ितों को भरोसे में लेते हैं। कई मामलों में पहले थोड़ी रकम लौटाकर या मुनाफा दिखाकर विश्वास पुख्ता किया जाता है, फिर बड़ी राशि मांगी जाती है। जैसे ही रकम फंसती है, बहाने शुरू हो जाते हैं।

कभी एंबेसी की देरी, कभी अतिरिक्त फीस, कभी मेडिकल या बायोमेट्रिक का नाम।अंत में संपर्क टूट जाता है।पुलिस ने ईगल सेल बनाकर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और दस्तावेजों की जांच तेज की है। कुछ गिरोहों पर कार्रवाई हुई, गिरफ्तारियां भी हुईं, लेकिन नेटवर्क बिखरने के बजाय फैलता दिख रहा है। वजह साफ है,कम जोखिम, ज्यादा मुनाफा और पीड़ितों की हिचक।कई युवा बदनामी या लंबी कानूनी प्रक्रिया के डर से शिकायत ही नहीं करते।

कैसे शुरू होती है ठगी :
पहला संपर्क अक्सर फेसबुक, वाट्सएप या जान-पहचान के जरिए होता है। एजेंट दावा करता है सीधे नौकरी,वीज़ा पक्का, तीन महीने में विदेश। फिर बुलाया जाता है किसी सजे-धजे आफिस में, जहां दीवारों पर कनाडा, दुबई, जापान के पोस्टर, नकली इंटरव्यू और बायोमेट्रिक टेस्ट का नाटक चलता है। भरोसा बनते ही 1.50 से दो लाख रुपये प्रति व्यक्ति की मांग होती है।

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केस: एक
इजरायल भेजने का झांसा देकर 12 लाख ठगे :
कैंट इलाके में खुले ट्रेनिंग सेंटर संचालक ने इज़रायल/खाड़ी देशों में नौकरी का वादा किया। चार युवकों से उसने 12 लाख रुपये ले लिए।फ्लाइट डेट दी गई, वीज़ा और ऑफर लेटर थमा दिए।जांच में कागज़ फर्जी निकले। पैसे मांगने पर बहाने और धमकी मिली।

केस : दो
दुबई में नौकरी का झांसा देकर छठ लाख ठगे:
गोला क्षेत्र में छह युवकों से दुबई नौकरी के नाम पर छह लाख वसूले गए। एजेंट ने फाइल प्रोसेस और टिकट कन्फर्म बताकर रुपये लिए।तय दिन न उड़ान हुई, न वीज़ा मिला। शिकायत पर गोला थाना पुलिस ने आरोपितों पर केस दर्ज किया।

केस : तीन
न्यूजीलैंड भेजने का झांसा देकर ठगे:
झंगहा इलाके में एक महिला एजेंट ने पहले यूरोप, फिर न्यूज़ीलैंड का आफर दिया। पीड़ित से 2.90 लाख रुपये ले लिए।वीज़ा की कापी दी गई, जो बाद में नकली निकली। दबाव बढ़ने पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया।

केस : चार
गोला क्षेत्र में ही छह युवकों को जापान/कनाडा भेजने का का सपना दिखाकर 15.99 लाख ऐंठे गए। चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचने से पहले उन्होंने जांच कराई तो दस्तावेज़ फर्जी पाए गए।




विदेश भेजने के नाम पर ठगी का संगठित गिरोह चलाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए नए सिरे से कार्ययोजना बनाई जा रही है।ईगल सेल को मजबूत करने के साथ ही हर शिकायत का प्राथमिकता से निस्तारण करने व शिकंजा कसने के निर्देश रेंज के सभी पुलिस कप्तान को दिए गए हैं।रेंज कार्यालय से इसकी मानीटरिंग होगी।
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- डा. एस. चनप्पा,डीआइजी रेंज
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