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Cancer Symptoms: कैंसर के लक्षण को न करें नजरअंदाज, जागरूकता से बच सकती है जान

deltin33 2025-12-21 15:08:09 views 1035
  

हेलो जागरण कार्यक्रम के दौरान कॉलर्स को कैंसर के बारे में जागरूक करते ग्रेटर नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के आंकोलाजी विभाग के कंसल्टेंट मेडिकल डॉ. प्रभात रंजन और कंसल्टेंट सर्जिकल डॉ. विशाल बंसल।



जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। बढ़ते प्रदूषण, अनियमित दिनचर्या, टोबैको व अल्कोहल का सेवन, अनुचित खानपान कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे सकते हैं। इसके अलावा भूख में कमी, लगातार वजन का गिरना, शरीर में दर्द का बने रहना, पेट में लंबे वक्त से चल रही कोई परेशानी, शरीर में कोई एक्टिव गांठ, सूजन व हमेशा बुखार का आते रहना। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

ये सभी लक्षण कैंसर के कारक हो सकते हैं। इन परेशानियों की अनदेखी कई बार कैंसर जैसी गंभीर समस्या को बढ़ावा देती है। इस बार हेलो जागरण कार्यक्रम में कालर्स ने कैंसर से संबंधित सवाल किए और उनका समाधान पाया। इस दौरान कालर्स को ग्रेटर नोएडा स्थित फोर्टिस हास्पिटल के आंकोलाजी विभाग के कंसल्टेंट मेडिकल डॉ. प्रभात रंजन और कंसल्टेंट सर्जिकल डॉ. विशाल बंसल ने जागरूक किया और कैंसर को हराने के सूत्र बताए।
सवाल : मेरी उम्र 32 वर्ष है। 2020 में कोरोना के बाद मेरे सिर में भारीपन, दर्द व झनझनाहट लगातार बनी रहती है। क्या यह कैंसर के लक्षण हैं?
- रोहित


जवाब : आपको न्यूरो से संबंधित समस्या हो सकती है। आप न्यूरोलाजिस्ट व ईएनटी डिपार्टमेंट में एक बार दिखा लें। इसके अलावा बी-12 या अन्य विटामिन की कमी के चलते भी कई बार ऐसे लक्षण दिखते हैं। वहीं नसों में कमजोरी से भी यह संभव है। अतः: एक बार डाक्टर से मिलकर इससे संबंधित जांच करा लें।
सवाल : मैं 52 साल का हूं। 26 अक्टूबर से मुझे कई बार बुखार आ चुके। पैरों में दर्द व अकड़न की समस्या भी है। मुझे क्या करना चाहिए?
- राजेश


जवाब : आप खून की जांच पहले करा लें। इसके अलावा कैल्शियम की स्थिति भी देखनी होगी। आपकी परेशानी को कुछ टेस्ट व स्कैनिंग के बाद ही सही से समझा जा सकता है।
सवाल : मेरी उम्र 87 वर्ष है। मुझे काफी समय से सीओपीडी की दिक्कत है। हीमोग्लोबिन डाउन रहता है। मुझे उचित सलाह दें?
- विद्यापति


जवाब : आप यदि कोलोनोस्कोपी, आईबी टेस्ट व एंडोस्कोपी करा रखी हों तो रिपोर्ट के साथ एक बार मिलकर पूरी जांच दिखा लें। संभव है कि आपको आईबी कीमोथेरेपी की जरूरत हो। यह काफी सहज और प्रभावकारी माना जाता है। इसके अलावा खुद की फिटनेस का पूरा ख्याल रखें। शुगर व बीपी को सही बनाए रखें। छाती का यदि सिटी स्कैन व ब्लड का एबीसी टेस्ट हुआ हो तो वह भी लेते आएं।
सवाल : मेरी उम्र 67 वर्ष है। मेरे गले में गांठ है। क्या यह कैंसर का रूप ले सकती है?
- रमाशंकर


जवाब : यदि गांठ स्थाई है तो किसी फिजिशियन से मिल लें। लेकिन उसमें दर्द व आकार में लगातार बदलाव आ रहा हो तो कैंसर से संबंधित कुछ सामान्य जांच कराए जा सकते हैं। यदि छोटी गांठ है तो लोकल एनेस्थीसिया द्वारा इसे छोटी सर्जरी से भी ठीक किया जा सकता है।
सवाल : मेरी उम्र 61 वर्ष है। मेरी छाती में इंफेक्शन बना हुआ है। क्या यह कैंसर का रूप ले सकता है?
- हरिनाथ


जवाब : यदि इंफेक्शन लंबे वक्त से है और इससे कफ के साथ खून भी आ रहा है तो आपको तत्काल सतर्क हो जाना चाहिए। यह सीओपीडी यानी क्रोनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, टीबी, अस्थमा, फुफ्फुसीय फाइब्रोसिस या फिर फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। जांच के बाद ही सही-सही बताया जा सकता है।
सवाल : मेरी उम्र 46 साल है। मेरे पैंक्रियाज में परेशानी रहती है। इससे संबंधित कैंसर के क्या लक्षण हो सकते हैं?
- देवेंद्र


जवाब : पाचन का सही रहना हमारे शरीर के लिए सबसे आवश्यक चीज है। ऐसे में पौष्टिक व सुपाच्य भोजन ही करना चाहिए। मोटे अनाज का सेवन अच्छा रहता है। आपको सतर्क होना जरूरी है। पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय से संबंधित पूरी जांच करा लेनी चाहिए। इसमें अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरसीपी टेस्ट यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस कोलांगियोपैन्क्रिएटोग्राफी अहम है।

जांच के बाद ही सही इलाज और जरूरी दवाओं के बारे में निर्णय लिया जा सकता है। एंडोस्कोपी भी आपके लिए आवश्यक है। इससे संबंधित इलाज को लेकर आज लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी अस्पताल में मौजूद है। इससे तुरंत समाधान और जल्द रिकवरी आज संभव हो सकी है।
सवाल : मुझे कुछ समय से पेट में भारीपन और भूख में कमी महसूस हो रही है। मेरा मार्गदर्शन करें?
- हूमा


जवाब : भूख में कमी के साथ यदि आपका वजन भी लगातार व तेजी से गिर रहा हो तो आपको सतर्क हो जाने की जरूरत है। आप तुरंत आंकोलाजी डिपार्टमेंट में खुद को दिखाएं। पेट की समस्या लंबे वक्त तक बने रहना अच्छा नहीं होता। डाक्टर की सलाह पर एंडोस्कोपी व सीटी स्कैन जैसे जरूरी टेस्ट भी करा लें। पेट में भारीपन को लेकर योग व व्यायाम का सहारा ले। खुद को एक्टिव रखें। कम बैठें। सुपाच्य भोजन करें। बैक्टीरिया आदि के संक्रमण से बचें। यदि संभव हो तो अपने लीवर व किडनी की भी जांच करा लें।
सवाल : मेरा पेट आजकल सही से साफ नहीं होता और स्टूल में कुछ दिन से खून भी आ रहा है। कृपया उचित सलाह दें?
- प्रभात


जवाब : ऐसे लक्षण पाइल्स के होते हैं। यदि यह लंबे वक्त से लगातार बना रहता तो आपको कैंसर को लेकर सोचना चाहिए। फिलहाल पाइल्स व कब्ज से संबंधित इलाज की आपको जरूरत है। आप चाहें तो एहतियात के तौर पर कोलोनोस्कोपी व बायोप्सी आदि टेस्ट करा सकते हैं। पेट का साफ न होना कई बार ट्यूमर यानी गांठ या अन्य रुकावट की वजह से हो सकता है। वहीं शुगर व जेनेटिक मामलों में भी ऐसे लक्षण देखने को मिलते हैं। आप डॉक्टर से मिलकर इससे संबंधित हर जरूरी टेस्ट करा लें ताकि परेशानी का कारण समझ कर सही इलाज संभव हो सके।
एहतियात, सही जांच और पूरे इलाज से कैंसर को हराना संभव : डॉ. प्रभात रंजन

कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। ऐसे में फोर्टिस हास्पिटल ग्रेटर नोएडा में इससे संबंधित सभी एडवांस ट्रीटमेंट अवेलेबल हैं। मेडिकल ऑन्कोलॉजी के अंदर यहां पर कीमोथेरेपी तो है ही, साथ ही एमिनोथैरेपी जैसी सुविधा भी उपलब्ध है, जो काफी प्रभावकारी और मरीजों के लिए बेहतर मानी जाती है। इसके साइड इफेक्ट बहुत ही कम और इफेक्ट बहुत अच्छा देखने को मिलता है।

इसमें पेशेंट के ही इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने योग्य बनाया जाता है। इससे कैंसर के पूरी तरह से खत्म होने की भी संभावना रहती है। कीमोथेरेपी से पहले लोग काफी डरते थे। लेकिन आजकल अलग-अलग म्यूटेशन को टारगेट करने की सुविधा उपलब्ध है। हर कैंसर का इलाज अलग-अलग होता है और दवा भी अलग होती है।

ऐसे में अब डरने की नहीं, बल्कि कैंसर से लड़ने की जरूरत है। आज इसका इलाज काफी प्रभावकारी हो चुका है। वहीं ब्लड कैंसर की बात करें तो फोर्टिस में बोन मैरो व एस्पिरेशन बायोप्सी मौजूद है। इसके अलावा मल्टीपल माइलोमा, ल्यूकेमिया, लिंफोमा के ट्रीटमेंट में टारगेटेड किमो से इलाज किया जाता है। वहीं इम्यूनोथेरेपी से भी इलाज है, जो एक बेस्ट आप्शन है।

जिन मरीजों में कैंसर अधिक फैल चुका हो और उनका शरीर काफी कमजोर हो, उन्हें पैलिएटिव थेरेपी से उपचार करते हैं। रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) या माइक्रोवेव थैरेपी भी यहां उपलब्ध है। यदि बात करें ब्लड कैंसर की तो इसके कई प्रकार हैं। इनके कॉमन लक्षण के तौर पर हम थकान, कमजोरी, पेट के लेफ्ट एरिये में स्पिन देखते हैं।

ल्यूकेमिया के भी कई रूप होते हैं। इनमें एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, एक्यूट माइलायड ल्यूकेमिया, क्रोनिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया व क्रोनिक माइलायड ल्यूकेमिया आदि हैं। इन सभी में थकान एक कॉमन लक्षण है। सीबीसी टेस्ट में हीमोग्लोबिन या वाइट ब्लड सेल्स बहुत कम या ज्यादा आ रहा है, तो सतर्क हो जाना चाहिए।

मुंह या स्टूल से ब्लीडिंग, शरीर पर नीले चकत्ते आदि होने पर भी सतर्कता जरूरी है। इस स्थिति में बोन मैरो जांच करानी आवश्यक है। इसके अलावा मल्टीपल माइलोमा जो हड्डियों में फैलने वाली बीमारी है। इसमें सिवियर पेन होता है। पैरों में, कमर व सोल्डर में कमजोरी व दर्द देखने को मिलती है। ऐसे में एमआरआई व पेट-सीटी (पीईटी-सीटी) स्कैन जरूरी है। जिन लोगों को कैंसर हो चुका हो उन्हें अपनी सेहत को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। इनकी इम्यूनिटी लो हो जाती है।

ऐसे में उन्हें संक्रमण, मौसम के बदलाव व प्रदूषण आदि से बचकर रहना चाहिए। सर्दी-जुकाम से बचाव जरूरी है। इसके अलावा स्मोकिंग व अल्कोहल बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए। प्लास्टिक के कप, ग्लास, बोटल व बर्तन से दूरी बना लेनी चाहिए। डाक्टर के सुझाए पौष्टिक भोजन ही खाने चाहिए। भीड़ से बचना चाहिए। इसके अलावा परिवार में माता पक्ष या पिता पक्ष में किसी को भी कैंसर रहा हो तो उन्हें अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है और उनके परिजनों को बीआरसीए जैसे टेस्ट करा लेना चाहिए।
कैंसर का इलाज आज काफी सरल और सफल संभव है : डॉ. विशाल बंसल

कैंसर की सर्जरी आज काफी सरल, सहज और कम समय वाली हो गई है। कैंसर के बढ़ने और फैलने का तरीका काफी अलग होता है। कैंसर सर्जरी की बात करें तो इसमें कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी का अहम रोल होता है। आज काफी मरीजों में देखने को मिलता है कि उनकी सही से प्रापर सर्जरी हो जाए तो वह पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।

ओरल कैंसर, गले, पेट, फेफड़े, आंत व यूरिन की थैली आदि में होने वाले कैंसर का आज प्रभावकारी सर्जरी से बेहतर इलाज संभव है। इसके अलावा महिलाओं के अंगों में होने वाले कैंसर में भी सर्जरी का अहम रोल है। कुछ मामलों में यदि सर्जरी संभव नहीं हो पाती तो कैंसर को कंट्रोल करना कठिन हो जाता है।

इसमें एक बात ध्यान देने की जरूरत है कि कैंसर के लक्षण दिखते ही सर्जरी करा लें। यानी अर्ली एज में ही यदि कैंसर डिटेक्ट हो गया तो सर्जरी से इसे काफी हद तक अच्छे से ठीक किया जा सकता है। सर्जरी समय से होने का मतलब है कि अगले स्टेज से पहले ही कैंसर को हरा देना। कई मरीजों को सर्जरी के बाद भी कीमों या रेडिएशन की जरूरत पड़ सकती है, हालांकि ऐसे मामले कम ही हैं। ॉ

आज कैंसर को लेकर काफी आधुनिक तकनीक व इलाज आ चुके हैं। अब पहले जैसे लंबे वक्त तक सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। लंबे वक्त तक इलाज या एडमिट रहने की आवश्यकता नहीं होती। कम समय में ही सर्जरी हो जाती है। जल्द ही अस्पताल से भी छुट्टी मिल जाती है। आज इंट्रा आपरेटिव केयर और पोस्ट आपरेटिव केयर में काफी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

यही वजह है कि 80-90 साल के पेशेंट की भी सर्जरी पासिबल हो गई है और रिकवरी भी अच्छी देखी जा रही है। वहीं मिनिमल एक्सेस सर्जरी व लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी भी आज बेस्ट विकल्प बन चुके हैं। महिलाओं में ओवरी, अंडकोष, सर्विक्स, बच्चेदानी का मुंह या बच्चेदानी के साथ अन्य कोई भी कैंसर हो और अर्ली स्टेज में पता चल जाए तो उसे ठीक करना सहज हो सकता है।

कई कैंसर तो प्रभावित अंग व हिस्से को निकालकर भी ठीक किए जा सकते हैं। वहीं बच्चों के कैंसर की बात करें तो उनके प्रोफाइल, स्टेज व कारण अलग-अलग होते हैं। आज इनकी भी सर्जरी संभव है। हालांकि दवा से इसे क्योर करना भी काफी हद तक पासिबल हो गया है। बच्चों के पेट में दर्द, गांठ या यूरिन में ब्लड आदि कैंसर के लक्षण होते हैं। ऐसे में सतर्कता बरतें।

अच्छा और पौष्टिक खानपान रखें। शरीर को हमेशा एक्टिव रखें। आलस्यता से बचें। योग और व्यायाम करते रहें। प्रदूषण, स्मोकिंग और अल्कोहल से बचकर रहें। पानी खूब पिएं। वहीं जैसे ही कैंसर के लक्षण दिखे या महसूस हो तो एहतियात के तौर पर ही सही पर डॉक्टर से मिलकर हर जरूरी जांच कराएं।
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