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Garhwa Crime News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 25 वर्ष सश्रम कारावास, एक लाख रुपये आर्थिक दंड भी लगा

LHC0088 2025-12-21 03:37:44 views 909
  

नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी को 25 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक लाख रुपये आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।



संवाद सहयोगी, गढ़वा। जिला व्यवहार न्यायालय गढ़वा के विशेष न्यायाधीश पोक्सो कोर्ट दिनेश कुमार की अदालत ने शनिवार को रंका थाना क्षेत्र अंतर्गत सिकट गांव के अखिलेश सिंह को 12 वर्षीया नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए जाने पर 25 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक लाख रुपये आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मामले में अभियाेजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजन उमेश दीक्षित एवं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार तिवारी ने पैरवी की।
बता दें कि एक गांव की नाबालिग पीड़िता की मां ने रंका थाना में 30 अगस्त को एक लिखित आवेदन देकर मामला दर्ज कराया था, जिसे कांड संख्या 134/2023 पर भादवि की धारा 376 एवं पोक्सो 4 के तहत दर्ज किया गया था।

प्राथमिकी के अनुसार 27 अगस्त 2023 को शाम पांच बजे पीड़िता ने सुदर्शन भुइयां के खोया हुआ मोबाइल खोजने के लिए गांव के अमराही महुआ के पास गई थी, तब वहां आए अखिलेश सिंह ने उसे 10 हजार रुपये देने की लालच देकर बोला कि किसी से मत कहना।

कहा- खाता नंबर दो, पैसा डाल देंगे और तुम मुझे चाचा मत बोलना। तुमसे शादी करेंगे। इसके बाद पीड़िता को पकड़कर सुनसान जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया। इस दौरान पीड़िता के मना करने पर उसे गला दबाने की धमकी देता रहा।

आरोपित ने दुष्कर्म करने के बाद पीड़िता को बेहोशी हालत में वहीं छोड़कर भाग गया। होश आने पर पीड़िता स्वयं अपने घर रात 11 बजे पहुंची। लेकिन फिर बेहोश हो गई। पीड़िता ने होश में आने पर घटना की जानकारी अपनी मां को दी।

इसके बाद पीड़िता के साथ उसकी मां आरोपित के घर गई तो उसे भी मारपीट करने की धमकी दी गई। आवेदन के आधार पर पुलिस आरोपी को पकड़ कर थाना ले आई। उसके बाद गांव के मुखिया एवं गणमान्य लोगों द्वारा लालच एवं दबाव देकर सुलह करा दिया।

लेकिन पीड़िता का पिता जो बाहर काम करता था, वह घर आया तो सुलह करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी के आधार पर अनुसंधान शुरू कर पीड़िता का मेडिकल एवं न्यायालय में बयान दर्ज कराया।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एक सितंबर 2023 को आरोपित ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने पीड़िता का जन्म से संबंधित प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेज उपलब्ध करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया।

न्यायालय ने मामले में संज्ञान लेते हुए आरोप गठन कर विभिन्न तिथियाें को नौ साक्षियों का साक्ष्य कलमबद्ध करते हुए उपलब्ध दस्तावेज एवं साक्ष्य के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए भादवि की धारा 506 में 2 वर्ष एवं पोक्सो एक्ट की धारा 4 (2) में 25 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100000 आर्थिक दंड की सजा सुनाई।
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