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यूपी में औद्योगिक अपराधों के लिए अब उद्यमियों को नहीं जाना पड़ेगा जेल, अध्यादेश को दी गई स्वीकृत

deltin33 2025-10-29 12:06:24 views 1028
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। निवेशकों व उद्योगपतियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। प्रदेश में और निवेश आकर्षित करने के लिए औद्योगिक अपराधों पर सजा का प्रविधान समाप्त करने का निर्णय किया गया है।

अब ऐसे मामलों में भारी भरकम अर्थदंड भरना होगा। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से उप्र सुगम व्यापार (प्राविधानों का संशोधन) अध्यादेश को स्वीकृति प्रदान की गई है। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही अध्यादेश लागू हो जाएगा।  

सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े 10 प्रकार के कानूनों को मिलाकर उप्र सुगम व्यापार( प्राविधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025 तैयार किया है। उद्यमियों के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा कारखानों से निकलने वाले खतरनाक रसायनों का था। इस मामले में उद्यमियों को पांच वर्ष तक कैद की सजा का प्रविधान था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सूत्रों के अनुसार, अब सजा को समाप्त कर उद्योगों के संचालकों पर अधिकतम 15 लाख रुपये अथवा 10 हजार रुपये प्रतिदिन का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इस बदलाव के बाद राज्य के जल आधारित 80 हजार से ज्यादा उद्योगों को राहत मिलेगी। इसी प्रकार गैरकानूनी तालाबंदी, छंटनी, अपंजीकृत औद्योगिक संगठन के लिए काम करना सहित लगभग मामलों में सजा का प्रविधान खत्म कर दिया गया है।

इन्वेस्ट यूपी व औद्योगिक विकास विभाग ने बीते दिनों प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ क्षेत्रवार बैठकें की थीं। बैठकों में उद्यमियों से राज्य में और अधिक निवेश बढ़ाने को लेकर सुझाव मांगे गए थे। अधिकतर उद्यमियों ने यह सुझाव दिया था कि वर्षों पुराने कानून के अनुसार कई ऐसे मामले हैं, जिनमें उद्यमियों की गलती न होने पर भी उन्हें सजा का प्रविधान है।

उद्यमियों ने कारखानों से निकलने वाले खतरनाक रसायनों के मामले में सजा के मुद्दे को सबसे प्रमुखता से उठाया था। केंद्र सरकार ने भी जल प्रदूषण संबंधी नियमों में बदलाव किया है। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम-2024 को संसद ने 15 फरवरी, 2024 को मंजूरी दी थी।  

उद्यमियों के हित में अध्यादेश में संशोधन कर इसे प्रदेश में लागू किए जाने की पहल कर दी गई है। औद्योगिक विकास विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा अन्य संबंधित विभाग कानून में बदलाव को लेकर पहले ही अपनी सहमति दे चुके हैं।

अभी तक राज्य में जल आधारित उद्योगों को प्रदूषण के मद्देनजर रेड, ओरेंज व व्हाइट श्रेणियों में रखा जाता है। केंद्रीय व राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इसके मानक तय किए गए हैं।
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