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फैसले बाहरी प्रभाव से मुक्त हों, तभी न्यायपालिका पर विश्वास अडिग होगा- जस्टिस भुइयां

deltin33 2025-10-28 19:14:27 views 1259
  

अदालत। (प्रतीकात्मक)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि निर्णयों को किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से मुक्त होकर दिया जाना चाहिए ताकि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बना रहे। जस्टिस भुइयां ने रविवार को यहां आल असम जजेज एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ करने के बाद \“न्यायिक शिष्टाचार और न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षाएं\“ विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जस्टिस भुइयां ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास निष्पक्ष और तटस्थ न्याय वितरण के माध्यम से अडिग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की वैधता जनता की धारणा पर निर्भर करती है, जिसमें यह भी शामिल है कि समाज में न्यायिक अधिकारियों को कैसे देखा जाता है। इसके लिए यह आवश्यक है कि निर्णय किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से मुक्त वातावरण में सुनाए जाएं। न्यायपालिका को कभी भी किसी प्रकार का पक्षपात करते हुए नहीं देखा जाना चाहिए।

पेशेवर और सार्वजनिक जीवन में संयम जरूरी- जस्टिस भुइयां

जस्टिस भुइयां ने जिलों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों से व्यावहारिक रूप से कार्य करने और अपने कर्तव्यों में संविधान की भावना को बनाए रखने का आग्रह किया। पेशेवर ईमानदारी बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायपालिका के सदस्यों को अन्य सेवाओं के सदस्यों के साथ निकटता से बचना चाहिए और पेशेवर और सार्वजनिक जीवन दोनों में संयम बनाए रखना चाहिए।

जिला न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि स्तर एक मजबूत और प्रभावशाली न्यायिक प्रणाली शीर्ष स्तर पर स्थिरता और विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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