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मुंबई में प्रदूषण से फेफड़ों के कैंसर के मामलों में भारी उछाल, सरकार ने विधानसभा में दी चेतावनी

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स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने बताया महाराष्ट्र भर में 1,677 कैंसर रोगियों की पहचान की गई। (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में एक गंभीर खुलासा किया है कि मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए कैंसर स्क्रीनिंग अभियान के नतीजों के अनुसार, मुंबई में निदान किए गए फेफड़ों के कैंसर के मामलों में 57 प्रतिशत प्रदूषण को प्रमुख योगदान कारक माना गया है। यह जानकारी मंगलवार को विधानसभा सत्र के दौरान स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने साझा की।
महाराष्ट्र भर में कुल 1,677 कैंसर रोगियों की पहचान हुई

अभियान के दौरान महाराष्ट्र भर में कुल 1,677 कैंसर रोगियों की पहचान हुई। मुंबई में फेफड़ों का कैंसर सबसे प्रमुख रूप से सामने आया, जहां प्रदूषण को एक बड़ा ट्रिगर बताया गया। मंत्री ने महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि की भी बात कही और कहा कि शुरुआती जांच में देरी से बीमारी का बोझ और बढ़ रहा है। मुंह, गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर के मामलों में भी बड़ी संख्या में मरीज सामने आए हैं।
तत्काल फंड जारी करने की मांग

विधानसभा में कई विधायकों, जिनमें सुनील प्रभु, अमीन पटेल, सुलभा खोडके, बाबासाहेब देशमुख, किशोर पाटिल, भास्कर जाधव, राजकुमार बडोले, समीर कुनावर और देवयानी फरांडे शामिल हैं, ने राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने टाटा मेमोरियल अस्पताल के साथ सरकारी और निजी अस्पतालों में कैंसर उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के लिए तत्काल फंड जारी करने की मांग की।

प्रतिक्रिया में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने कहा कि सरकार ने कैंसर से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। इसमें तालुका, जिला और राज्य स्तर पर जांच व उपचार की त्रिस्तरीय व्यवस्था विकसित करना शामिल है। उन्होंने टाटा मेमोरियल अस्पताल की तर्ज पर लगभग 100 नए विशेष अस्पताल स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्य के सभी 36 जिलों में कैंसर निदान वैन तैनात की जाएंगी

महाराष्ट्र बजट सत्र 2026 के दौरान घोषणा की गई कि राज्य के सभी 36 जिलों में कैंसर निदान वैन तैनात की जाएंगी। फिलहाल केवल 8 कैंसर डायग्नोस्टिक वैन कार्यरत हैं, लेकिन इन्हें बढ़ाकर पूरे राज्य में मोबाइल जांच इकाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, 8 जिलों में रेडियोथेरेपी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और शेष 26 स्थानों पर निविदाएं जारी कर दी गई हैं।

मंत्री ने महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के तहत पीईटी स्कैन को शामिल करने की योजना का भी जिक्र किया, क्योंकि यह जांच मरीजों के लिए काफी महंगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रारंभिक निदान में देरी से मामलों की संख्या बढ़ी है, इसलिए स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा ताकि समय पर पता चल सके और उपचार संभव हो।
प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा गैर-धूम्रपान कारण बन चुका है

यह खुलासा मुंबई की खराब हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा रहा है और विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण अब धूम्रपान के अलावा फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा गैर-धूम्रपान कारण बन चुका है। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर फोकस करने का संकेत दिया है।   
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