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एक देश-एक चुनाव: अब राज्यों से भी राय लेगी संसदीय समिति, लोकसभा-विधानसभा इलेक्शन होंगे साथ?

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एक राष्ट्र-एक चुनाव पर गठित संसदीय समिति अब आर्थिक विशेषज्ञों और राज्यों की भी लेगी राय (फाइल फोटो)



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को साथ-साथ कराने और उसके सौ दिनों के भीतर ही नगरीय निकायों व पंचायत चुनावों को कराने के विधेयक पर रायशुमारी में जुटी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अब तक पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, संविधान विशेषज्ञों व कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिले सुझावों के बाद से काफी उत्साहित है।

ऐसे में जल्द ही वह आर्थिक विशेषज्ञों और सभी राज्यों के राजनीतिक दलों के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू करने की तैयारी है। समिति का मानना है कि जितनी जल्दी इस पर अमल शुरू हो जाएगा, देश को उतना ही फायदा मिलेगा।
समिति ने दिए सुझाव

समिति ने हाल ही में पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और संविधान विशेषज्ञों के साथ ही इससे संबंधित विधेयक पर चल रही चर्चा का पूरा किया है। जिसमें जस्टिस डीवाय चंद्रचूड, जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस वीआर गवई, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस यूयू ललित व जस्टिस रंजन गोगोई ने समिति को अपने सुझाव दिया।

समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी का दावा है कि इनमें से किसी भी पूर्व न्यायाधीश ने इस पहल को संवैधानिक ढांचे के खिलाफ नहीं बताया है। साथ ही कुछ ऐसे अहम सुझाव भी दिए है ताकि भविष्य में इसका दुरुपयोग न हो सके।

इससे पहले भी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अध्यक्षता में गठित समिति के सामने भी सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व न्यायाधीशों जस्टिस दीपक मिश्रा व जस्टिस एस ए बोबडे ने भी अपने सुझाव दिए थे। हालांकि इस समिति के एक अन्य सदस्य ने अनौपचारिक चर्चा में बताया कि कम से कम दो प्रमुख शीर्ष जजों ने एक साथ चुनाव को संविधान के बुनियादी ढांचे की कसौटी पर खरा उतरने को लेकर संदेह जताए।

जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने दावा किया कि एक राष्ट्र-एक चुनाव की यह पहल ऐसी है कि इसका विपक्ष दलों द्वारा भी समर्थन किया जा रहा है। उनके मुताबिक पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने समिति के सामने अपने सुझाव किया थे साथ ही इसका समर्थन किया था।
महाराष्ट्र सीएम और डिप्टी सीएम भी दे चुके हैं सुझाव

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री भी अपना सुझाव दे चुके है। चौधरी के मुताबिक इसे कब से लागू किया जाएगा, यह संसद पर निर्भर करता है। लेकिन समिति जल्द ही अपने काम पूरा करने में जुटी हुई है ताकि विधेयक को अधिक समृद्ध और पारदर्शी बनाया जा सके। गौरतलब है कि एक राष्ट्र-एक चुनाव पर गठित संयुक्त संसदी समिति ने हाल ही में अपनी बैठक की थी।

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