बदायूं-बिल्सी मार्ग किनारे लगा नई जेल का बोर्ड और सामने दिखाई देती जमीन। जागरण
जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले के अधिकारियों और नेताओं ने जो नई जेल का सपना देखा था। वह आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। बिल्सी-बदायूं मार्ग के किनारे नई जेल की जमीन स्थित है और उस पर बोर्ड भी लगा हुआ है। यह जमीन अपने कब्जे में है लेकिन इसके दो मामलों का निस्तारण नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से जेल के निर्माण को हरी झंडी नहीं मिल पा रही है। उनमें एक शत्रु संपत्ति का मामला है और दूसरा मामला जमीन के इकरारनामा से संबंधित है।
उसकी सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन में चल रही है। शहर में कचहरी के नजदीक स्थित जिला कारागार पिछले कई वर्षों से ओवरलोड है। अभिलेखों में इसकी क्षमता 529 से लेकर 600 तक मौजूद है लेकिन पिछले कुछ वर्ष पहले की बात करें तो इसमें बंदियों की संख्या 1400 तक पहुंच गई थी, जो क्षमता से तीन गुणा ज्यादा थी।
एक बार को जेल में बंदियों के लिए जगह तक नहीं बची थी। खचाखच भरी जेल में तमाम अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा था, जिसकी वजह से जेल प्रशासन को भी कई दिक्कतें हो रही थीं लेकिन जब से यह कानून आया है कि सात साल से नीचे की सजा वाले अपराधियों का पुलिस चालान नहीं कर सकती तब से जिला कारागार में बंदियों की संख्या में गिरावट आई है।
इस समय से जेल में 900 से लेकर 1000 तक बंदियों की संख्या रह रही है। ज्यादा संख्या बढ़ने पर सजायाफ्ता बंदियाें को दूसरी जेलों में शिफ्ट कर दिया जाता है। इन तमाम समस्याओं को देखते हुए जिला प्रशासन और जिले के नेताओं ने नई जेल निर्माण का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था।
इसके लिए बिल्सी-बदायूं मार्ग पर गांव बदरपुर के नजदीक नई जेल को जगह चिह्नित की गई और उसमें अधिकतर जमीन अधिग्रहण भी कर ली गई। यहां जिला कारागार के नाम से बोर्ड भी लगा दिया गया है लेकिन इसके दो मामलों को लेकर पेच फंसा हुआ है। इनमें एक मामला शत्रु संपत्ति का है, जिसकी सुनवाई लखनऊ में चल रही है।
अभी उसका निर्णय नहीं हो पाया है, तो वहीं दूसरा मामला एक जमीन के इकरारनामा से जुड़ा हुआ है, जिसका मुकदमा सिविल जज सीनियर डिवीजन बदायूं में विचाराधीन है। अभी उसका भी निर्णय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि जब तक इन दोनों मामलों के निर्णय नहीं हो जाते, तब तक नई जेल का निर्माण भी शुरू नहीं हो पाएगा। अभी दोनों मामलों के निपटाने में समय लगेगा।
कई बार लखनऊ भेजा जा चुका है रिमाइंडर
लखनऊ में विचाराधीन शत्रु संपत्ति के मामले के निपटारे को कई बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। जेल प्रशासन का कहना है कि वह यहां से जिलाधिकारी को रिमाइंडर भेजते हैं और वहां से सीधे लखनऊ को रिमाइंडर भेज दिया जाता है लेकिन यह मामला अभी तक नहीं निपटा है। अभी केवल कागजी करवाई चल रही है।
नई जेल में होगी दो हजार बंदियों की क्षमता
बिल्सी-बदायूं मार्ग पर प्रस्तावित नई जेल की क्षमता भी पुरानी जेल की अपेक्षा तीन गुणा ज्यादा होगी। अभिलेखों के अनुसार इसकी क्षमता दो हजार बंदियों की होगी, जिसमें कम से कम तीन हजार से ज्यादा बंदी आराम से रह सकेंगे। यह जेल 32.765 हेक्टेयर भूमि में प्रस्तावित है।
नई जेल के निर्माण की सारी तैयारियां हैं। अधिकतर जमीन भी अधिग्रहण है लेकिन अभी एक शत्रु संपत्ति का मामला और दूसरा जमीन के इकरारनामा का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिसकी वजह से जेल का निर्माण रुका हुआ है। यह दोनों मामले निस्तारित होते ही जेल के निर्माण की शुरुआत करा दी जाएगी।
- राजेंद्र प्रसाद, जेल अधीक्षक
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