प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, रायबरेली। ग्राहक ने भारतीय जीवन बीमा से पॉलिसी ली, जिसमें उसकी पत्नी नामिनी रही। बीमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद पत्नी ने दावा क्लेम किया, लेकिन बीमा कंपनी ने जानबूझकर दावा नो क्लेम कर दिया। उपभोक्ता फोरम ने महिला को न्याय दिलाते हुए कंपनी को 12 लाख भुगतान का आदेश दिया।
लालगंज निवासी कमला ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बताया कि पति राम सनेही ने वर्ष 2021 में भारतीय जीवन बीमा से तीन लाख की पॉलिसी ली थी। जिसके लिए राम सनेही ने प्रीमियम 4579 रुपये जमा किए, बीमा 2041 तक वैध था। इसके बाद वादिनी के पति ने 4654 रुपये प्रीमियम जमा कर एक और तीन लाख का बीमा करवाया था जो कि 15 साल के लिए वैध था।
बीमा अवधि में वादिनी के पति की ट्रेन दुर्घटना में मौत हो गई। वादिनी ने मृत्यु प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेज लगाकर दावा क्लेम किया। बीमा कंपनी ने सर्वेयर से जांच कराकर दावा क्लेम के लिए फाइल स्वीकार कर ली। काफी दिनों तक किसी प्रकार की सूचना न प्राप्त होने पर वादिनी ने कार्यालय में संपर्क किया।
वादिनी ने बताया कि बीमा कर्मचारी दावा भुगतान के लिए धनराशि की मांग कर रहे थे। वादिनी के मना करने पर बीमा कंपनी ने दावा नो क्लेम कर वादिनी के खाते में पांच हजार रुपये भेज दिया। वादिनी ने थक हार कर उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। नोटिस तामील कराई गई। बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने बहस के दौरान कहा कि बीमित की मृत्यु पहली पालिसी के ढाई माह बाद और दूसरी पालिसी के 10 दिन बाद हो गई, ऐसी पॉलिसी अल्पावधि मृत्यु दावा की श्रेणी में आती हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि जीआरपी की रिपोर्ट, प्वाइंट मैन व खान पान वाले वेंडर के बयान से यह निष्कर्ष निकला की वादिनी के पति ने आत्महत्या की थी। वादिनी के पति ने एक वर्ष के अंदर ही आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा कि पॉलिसी के एक वर्ष पूरा होने के बाद ही दावा क्लेम दिया जाता है। अगर एक वर्ष के अंदर है तो भुगतान नहीं किया जाता है।
वादिनी के वरिष्ठ अधिवक्ता केपी वर्मा ने जवाब दिया कि वादिनी के पति टिकट लेकर कानपुर जा रहे थे। ट्रेन में चढ़ते समय वादिनी के पति का पैर फिसल गया और ट्रेन के नीचे आने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने आत्महत्या नहीं की। अधिवक्ता ने बताया कि ट्रेन से कटकर मरने पर रेल अधिकरण वाराणसी ने आठ लाख का एवार्ड पारित किया है। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मदन लाल निगम, सदस्य प्रतिमा सिंह व सुनीता मिश्रा ने दोनों अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद वादिनी के हक में फैसला दिया।
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