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अदालत के आदेश का उल्लंघन पड़ा भारी, स्टेटस रिपोर्ट में खामी पर एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर से मांगा जवाब

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साकेत कोर्ट ने एमसीडी के अधिकारियों की ओर से अदालती आदेशों की अनदेखी करने पर कड़ा रुख अपनाया है।



जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने एमसीडी के अधिकारियों की ओर से अदालती आदेशों की अनदेखी करने पर कड़ा रुख अपनाया है। साकेत कोर्ट के सीनियर सिविल जज अनिमेष भास्कर मणि त्रिपाठी ने एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर स्पष्टीकरण मांगा। जज अनिमेष भास्कर मणि त्रिपाठी मंगलवार को संपत्ति विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली तारीख तक नियमों के अनुसार स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, तो डीसी को स्वयं कोर्ट में पेश होना होगा। कोर्ट ने दो दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर विवादित संपत्ति के संबंध में कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था।

इस स्पष्टीकरण को एमसीडी के डीसी की ओर से अग्रेषित (फारवर्ड) किया जाना अनिवार्य था।मामले में 17 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर केवल एई और जेई के हस्ताक्षर थे। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ईई ने अपना कोई अलग स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया। स्टेटस रिपोर्ट को डीसी की तरफ से अग्रेषित भी नहीं किया गया था, जो सीधे तौर पर अदालत के पिछले आदेश का उल्लंघन है।

रिपोर्ट को अपूर्ण और अवैध मानते हुए कोर्ट ने इसे रिकार्ड पर लेने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2025 को रोक केवल एमसीडी की पिछली रिपोर्ट के आधार पर लगाई थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, संपत्ति में किया गया अतिरिक्त निर्माण \“कंपाउंडेबल\“ (शमन योग्य) श्रेणी का है और मालिक ने इसे ठीक कराने का आश्वासन दिया है।

इस आधार पर उन्होंने अंतरिम रोक हटाने की मांग की। हालांकि, न्यायाधीश ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब तक दो दिसंबर 2025 के आदेश का पूर्ण पालन नहीं होता और सही स्टेटस रिपोर्ट नहीं आती, तब तक अंतरिम आदेश जारी रहेगा।
सही रिपोर्ट करें जमा या कोर्ट में हों हाजिर

एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर को जारी कोर्ट नोटिस के अनुसार उन्हें या तो सही रिपोर्ट दाखिल करनी होगी या 18 अप्रैल को मामले पर होने वाली अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। साथ ही अगली सुनवाई पर संबंधित कार्यकारी अभियंता और सहायक अभियंता को उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। संपत्ति पर लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।

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