ब्लिंकिट के दिल्ली और गुरुग्राम के गोदामों पर छापेमारी कर करीब 50 ऐसे चाकू बरामद किए।
स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के ख्याला में गत 10 फरवरी को चाकू मारकर एक नाबालिग की हत्या कर दी गई। इसकी जांच करते हुए पुलिस को पता चला कि हत्या में प्रयुक्त बटनदार चाकू को ई-काॅमर्स प्लेटफाॅर्म ब्लिंकिट से खरीदा गया था। इसी तरह के चाकू का इस्तेमाल एक और हत्या में भी होने की भी बात सामने आई। इसके बाद पुंलिस ने ब्लिंकिट के दिल्ली और गुरुग्राम के गोदामों पर छापेमारी कर करीब 50 ऐसे चाकू बरामद किए जिनकी बिक्री प्रतिबंधित थी।
यह चेतावनी से कम नहीं
ताजा मामला बवाना में सामने आया है। यहां दुकानों में तोड़फोड़ करने के आरोप में पांच नाबालिग पकड़े गए, इनके पास से भी जो चाकू बरामद हुआ है वह ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म से ही खरीदा था। हालांकि अभी पुलिस को यह पता नहीं चल पाया है कि आरोपितों ने किस ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म से ये चाकू खरीदा था। ये घटनाएं राजधानी में बढ़ते अपराध को लेकर चेतावनी दे रही हैं।
तेजाब भी बिक रहा ऑनलाइन
ऑनलाइन चाकू खरीदने ये मामले नए नहीं है। अक्टूबर 2022 में आदर्श नगर में दीपांशु नामक छात्र की हत्या मामले में भी ऑनलाइन चाकू खरीदने की बात सामने आई थी। इसके बाद दिसंबर 2002 में द्वारका इलाके में एक स्कूली छात्रा पर दो नकाबपोश लड़कों ने तेजाब फेंका था। जांच में पता चला था कि इन्होंने तेजाब एक ई-काॅमर्स वेबसाइट से खरीदा था। ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म पर कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले रासायनिक पदार्थ उपलब्ध हैं जो खुदकुशी का कारण बनते हैं।
कुछ विक्रेता तोड़ रहे कानून
ऐसा एक मामला छत्तीसगढ़ में सितंबर 2025 में सामने आ चुका है। यहां एक महिला ने ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म से रसायनिक पदार्थ मंगवाया और इन्हें निगलकर अपनी जान दे दी। इस तरह के कई अन्य मामले भी सामने आ चुके हैं। जानकार बताते हैं कि सिर्फ ई-काॅमर्स प्लेटफाॅर्म ही नहीं फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर कुछ विक्रेता कानूनों की अनदेखी प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री कर रहे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
“आर्म्स एक्ट के प्रविधान का उल्लंघन कर चाकू की बिक्री एक गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में न केवल विक्रेता, बल्कि निर्माण करने वाली कंपनी की पहचान कर उन पर भी मुकदमा चलाया जाना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अलग-अलग स्थानों से प्रतिबंधित चाकू बरामद होते हैं, तो हर स्थान पर अलग एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। एक ही एफआईआर में सभी बरामदगी दिखाने से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो सकता है। ई-काॅमर्स कंपनियों को प्रतिबंधित चाकुओं की डिलीवरी से पहले स्थानीय पुलिस से सलाह लेनी चाहिए। ऑनलाइन उत्पादों की बुकिंग में उम्र का कोई कड़ा प्रतिबंध न होने से खतरनाक हथियार नाबालिगों के हाथ लग रहे हैं।“
-वीरेंद्र पुंज, सेवानिवृत्त एसीपी और कानूनी मामलों के जानकार
वारदात और बरामदगी के मामले
- 10 फरवरी 2026 : ख्याला इलाके में नाबालिग की चाकू गोदकर हत्या। चाकू ब्लिंकिट से आर्डर कर मंगाया गया।
- एक अक्टूबर 2022 : आदर्श नगर इलाके में दीपाशुं नामक छात्र की हत्या में छात्रों ने ऑनलाइन मंगवाया था चाकू।
- जुलाई 2022 में दिल्ली पुलिस ने एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया था जिनसे चीन से अवैध तरीके से मंगाए गए 14,000 से अधिक बटनदार (स्प्रिंग-एक्ट्यूएटेड) चाकू बरामद किए थे। इन चाकुओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से दिल्ली और एनसीआर में स्ट्रीट क्राइम और लूटपाट में अपराधियों द्वारा किया जाता था। गिरोह इन चाकुओं को ई-कामर्स प्लेटफाॅर्म के माध्यम से बेचता था।
- 2021-22 में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ऐसे गिरोहों को पकड़ा जो फेसबुक पर \“देसी कट्टा-पिस्टल\“ के विज्ञापन डालते थे। अपराधी एडवांस पेमेंट लेकर कूरियर या अन्य तरीके से डिलीवरी करते थे।
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