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यूसीबी घोटाला: शराब कारोबारी की पांच करोड़ की एफडी पर 08 करोड़ की बैंक गारंटी, RBI से छिपाई

Chikheang 4 hour(s) ago views 937
  

बैंक के हाथ खड़ा करने के बाद सामने आई हकीकत. Concept Photo



सुमन सेमवाल, देहरादून। यूसीबी में की गई वित्तीय अनियमितता की कड़ी में एक और गंभीर मामला सामने आया है। एक शराब कारोबारी ने बताया कि उनका बैंक में करीब 09 करोड़ रुपए फंसा है। उन्होंने आठ करोड़ रुपए की जो बैंक गारंटी आबकारी विभाग में जमा कराई है, उसके लिए बैंक में पांच करोड़ रुपए की एफडी कराई गई थी। लेकिन, अब पता चला है कि बैंक गारंटी सिर्फ कागजों में दर्शाई गई है।

पत्रकार वार्ता के दौरान शराब कारोबारी ने कहा कि उन्होंने बैंक गारंटी को लेकर प्रबंधन से संपर्क किया था, लेकिन पता चला कि उसे आरबीआइ के समक्ष घोषित ही नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठाया गया कि फिर पैसा कहां गया? इस बात का ठोस जवाब अभी नहीं मिल पाया है।

दरअसल, अब शराब कारोबारी के समक्ष आबकारी विभाग की देनदारी का संकट खड़ा हो गया है। इस तरह की दशा में सामान्य तौर पर आबकारी विभाग संबंधित कारोबारी की बैंक गारंटी जब्त कराकर कैश करा सकता है। मगर, इस मामले में तो बैंक गारंटी की वास्तविकता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में आबकारी विभाग इस बैंक गारंटी को कैसे कैश कराएगा, यह भी अपने आप बड़ा सवाल बन गया है। संभव है कि निकट भविष्य में इस मामले में आबकारी विभाग बैंक प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अमल में लाए।
बैंक को कर्जदारों से लेने हैं 58 करोड़, 105 करोड़ तक जुटाए जा सकेंगे

देहरादून: जिन खातेदारों के 124 करोड़ रुपए अर्बन कोओपरेटिव बैंक में फंसे हैं, उनमें कुछ बैंक के शेयर धारक भी हैं। ऐसे खातेदारों के अनुसार बैंक को सभी तरह के कर्जदारों (एनपीए खाते भी) करीब 58 करोड़ रुपए की वसूली करनी है। यदि यह वसूली आरबीआइ के माध्यम से करा दी जाती है तो खातेदारों की बड़ी राशि वापस दिलाई जा सकती है। इसके अलावा बैंक के 30 करोड़ रुपए भारत सरकार फंड में जमा हैं।

साथ ही बैंक ने नियमों के मुताबिक अन्य बैंक में करंट अकाउंट के रूप में 15 से 16 करोड़ रुपए जमा करा रखे हैं। इसके अलावा बैंक के पास 1.5 कर रुपए कैश के रूप में भी है। यदि सभी तरह की धनराशि जुटा ली जाती है तो बैंक के पास खातेदारों को देने के लिए 105 करोड़ रुपए के करीब की रकम मिल जाएगी। हालांकि, इसके लिए लंबी प्रकृति से गुजरना पड़ सकता है। संभव है कि बैंक की समाप्ति की स्थिति में आरबीआइ परिसमापक को नियुक्त करे और फिर वसूली कराई जाए। फिर भी 23 करोड़ रुपए ऐसे रह जाएंगे, जिनकी अदायगी मुश्किल हो सकती है।
बैंक प्रबंधन ने मांगी सोमवार तक की मोहलत

खातेदारों की रकम वापसी की तेज होती मांग के बीच चेयरमैन ने कुछ न कुछ हल निकालने के लिए सोमवार दोपहर बाद चार बजे तक का समय मांगा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि आरबीआइ के माध्यम से कुछ तात्कालिक हल निकाला जाए।

यह भी पढ़ें- देहरादून यूसीबी बैंक घोटाला: 9000 ग्राहक परेशान, सीएम धामी से सीबीआई जांच की मांग
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