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बिहार में भूमि सुधार: असंभव को संभव बनाने की दिशा में बड़ा अभियान, 20 जिलों में सर्वेक्षण का काम पूरा

deltin33 1 hour(s) ago views 143
  



राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में जमीन से जुड़ी समस्याओं का निदान असंभव को संभव बनाने जैसा है। 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में राज्य में एनडीए की सरकार बनी। उसी कार्य सूची में भूमि सुधार को प्राथमिकता में रखा गया। उसके अगले साल जून 2006 में डी बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया। आयोग की अनुशंसा दो साल बाद आई।

समीक्षा में पाया गया कि यह राज्य की सामाजिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं है। हालांकि बंटाइदारों को कुछ सुविधाएं देने संबेधी आयोग की अनुशंसाएं स्वीकार कर ली गईं। आयोग की अनुशंसाओं को पूरी तरह लागू न करने के बावजूद भूमि सुधार से जुड़ा प्रयास बाधित नहीं हुआ। 2010 में बिहार राजस्व सेवा के रूप में एक नए संवर्ग का गठन किया गया। उद्देश्य यह था कि जमीन से जुड़े मामलों के निबटारे के लिए समर्पित और संगठित संवर्ग हो।

इसके साथ ही भूमि सुधार की व्यापक योजना पर काम शुरू हुआ। दाखिल खारिज के लिए अलग नियमावली बनी।भूमि विवाद के समग्र निबटारे या स्थायी समाधान के लिए विशेष भूमि सर्वेक्षण शुरू किया गया। यह अभी चल रहा है। इसे 2027 में पूरा हो जाने की उम्मीद है। 38 में से 20 जिलों में भूमि सर्वेक्षण लगभग पूरा हो गया है। बचे हुए 18 जिलों में यह मध्य चरण में है।

कोरोना महामारी के कारण इसकी गति प्रभावित नहीं हुई होती तो अब तक सर्वेक्षण पूरा हो गया होता। सबसे बड़ी चुनौती जमीन के रिकार्ड को व्यवस्थित करने की थी। यह रिकार्ड कर्मचारियों के बस्ते से लेकर जमींदारी के समय की कचहरियों या जमींदारों के वंशजों के पास पड़ी हुई थी। सरकारी कार्यालयों में भी इसे जैसे-तैसे रखा गया था। इन सबको डिजिटाइज किया गया।

राज्य में चार करोड़ से अधिक जमाबंदी है। इन्हें डिजिटाइज कर दिया गया है। ताजा स्थिति यह है कि जमीन से जुड़ी हरेक जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है। दाखिल-खारिज, खाता-खेसरा और रकबा में सुधार, नाम में परिवर्तन, पारिवारिक बंटवारा जैसी सेवाएं आनलाइन हो गई हैं। लगान जमा करना आसान हो गया है।

इतना ही नहीं सभी सेवाओं के लिए अधिकतम समय-सीमा तय कर दी गई हैं। राज्य में ज्यादा जमीन के रिकार्ड पुराने कैडेस्ट्रल सर्वे काल के हैं। इसी पृष्ठभूमि में राजस्व महाभियान चलाया जा रहा है। 46 लाख लंबित आवेदनों की पहचान कर 31 मार्च 2026 तक निष्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 34 लाख से अधिक दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है।

  • आवेदन से आदेश तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया।
  • अंचल स्तर पर प्रत्येक शनिवार को जनता दरबार आयोजित हो रहा है। सीएलआर और एडीएम के स्तर पर निष्पादन दर 51.7 प्रतिशत से से बढ़कर 55.9 प्रतिशत हो गया है।
  • अभियान बसेरा-दो के तहत 70,279 सुयोग्य परिवारों को भूमि आवंटन किया गया है।
  • निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 13 हजार एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। -12 दिसंबर 2026 से शुरू हुआ भूमिसुधार जनकल्याण संवाद आठ प्रमंडलों तक पहुंच चुका है।
  • दाखिल-खारिज, परिमार्जन और मापी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रमंडलवार काउंटर, लाइव प्रसारण और वरीय अधिकारियों की उपस्थिति में सुनवाई की व्यवस्था की गई।-इस पहल से आनलाइन दाखिल-खारिज निष्पादन दर 75 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हुआ, जबकि लंबित मामले 25 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत रह गए।
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