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संजू सैमसन की फॉर्म बनी चिंता का विषय
पीटीआई, नई दिल्ली: प्रतिभा की कोई कमी नहीं लेकिन पिछले एक दशक के दौरान टी-20 करियर में प्रदर्शन में निरंतरता की कमी संजू सैमसन को भारतीय क्रिकेट की सबसे दिलचस्प विरोधाभासी शख्सियतों में एक बनाती है। न्यूजीलैंड के विरुद्ध पहले तीन मैचों में 10, छह और शून्य के स्कोर के साथ उनका हालिया खराब प्रदर्शन भी निराशाजनक तस्वीर पेश करता है।
उनकी यह कमजोर फॉर्म तब और अधिक परेशान करती है जब ईशान किशन का खेल प्रशंसकों और विशेषज्ञों दोनों से वाहवाही लूट रहा है। क्रिकेट में आंकड़ों और \“डाटा\“ के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है, जिसे अक्सर लोग एक ही मान लेते हैं। जहां आंकड़े एक सपाट तस्वीर पेश करते हैं, वहीं \“डाटा\“ उन्हीं आंकड़ों का गहराई ये विश्लेषण करने की कोशिश करता है।
ऐसे हैं आंकड़े
सैमसन ने 11 वर्षों में खेले गए 55 टी-20 मैचों में 147 से अधिक की स्ट्राइक रेट से 1048 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके नाम तीन अर्धशतक और तीन शतक हैं, जिनमें से दो 2024 के अंत में दक्षिण अफ्रीका की धरती पर आए। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध उनकी स्ट्राइक रेट 131, इंग्लैंड के विरुद्ध 118 और न्यूजीलैंड के विरुद्ध घटकर 113 रह जाती है।
सैमसन ने 2025 के बाद जब भी पारी की शुरुआत की है, कुछ स्पष्ट रुझान सामने आए हैं। पिछले वर्ष की शुरुआत में इंग्लैंड ने लगातार पांच मैचों में शरीर की ओर तेज और शॉट गेंदें डालकर उन्हें परेशानी में डाला, जिससे वे बिना ताकत और टाइमिंग के जल्दबाजी में पुल शॉट खेलने को मजबूर हुए। मैट हेनरी और काइल जैमीसन ने इस साल (2026) सीधी लाइन में या लेग-मिडिल की दिशा में गेंदें डालीं, जिससे सैमसन को आफ-साइड पर खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला।
उनकी बल्लेबाजी में आ रही दिक्कतों को भारत के पूर्व बल्लेबाज डब्ल्यूवी रमन और राजस्थान रॉयल्स के \“हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर\“ जुबिन भरुचा ने समझाया। भरुचा ने लंबे समय तक सैमसन के साथ करीब से काम किया है। रमन ने कहा, संजू को तकनीक और मानसिक दोनों मोर्चों पर थोड़ी समस्या है। उनकी अलग-अलग गति के गेंदबाजों के विरुद्ध शॉट खेलते समय उनके बल्ले की गति लगभग समान रहती है। यह उन्हें 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले गेंदबाजों के विरुद्ध सफलता दिला सकती है। लेकिन 130 से अधिक या कम गति और उसमें बदलाव होने पर दिक्कत आती है।
उन्होंने कहा, “समाधान यह है कि गेंद की गति के अनुसार बल्ले की गति को समायोजित किया जाए। ऐसा होते ही उनकी बल्लेबाजी सुधर जाएगी।
मानसिक पहलू पर रमन ने कहा, उन्हें पता है कि सफेद गेंद के क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज की जगह के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। शायद यही दबाव डाल रहा है। फिर भी उनमें इस समस्या से उबरने की पूरी क्षमता है। वह एक सक्षम खिलाड़ी हैं और भारत के लिए प्रदर्शन कर सकते हैं। रमन यह नहीं मानते कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करना उनकी लय को बिगाड़ता है।
मानसिकता है समस्या
राजस्थान रायल्स में सैमसन, यशस्वी जायसवाल और ध्रुव जुरैल जैसे खिलाड़ियों के साथ काम चुके भरुचा मानते हैं कि यह समस्या तकनीक से अधिक मानसिक है। उन्होंने कहा, तकनीकी रूप से कुछ भी गलत नहीं है। यह सब दिमाग में है। स्पष्टता की कमी के कारण वह कभी शानदार तो कभी औसत दिखते हैं। यह हर खिलाड़ी के साथ होता है। हाल ही में सूर्यकुमार यादव के साथ भी ऐसा हुआ है। बस इसे बेहतर तरीके से संभालना सीखना होता है।
रविचंद्रन अश्विन ने भी हाल में बताया था कि न्यूजीलैंड ने उन पर सीधी लाइन से गेंदबाजी की जबकि इंग्लैंड ने शरीर की दिशा में शॉर्ट और तेज गेंदबाजी की थी। भरुचा ने इस पर कहा, ऐसी स्थिति में उन क्षेत्रों में थोड़ा अधिक अभ्यास करना होता है, जिन्हें आप अपनी कमजोरी मानते हैं। सैमसन ऑफ साइड पर ज्यादा रन बनाना चाहते हैं।
भरुचा से जब पूछा गया कि सैमसन इस कमियों को कैसे दूर कर सकते हैं तो उन्होंने कहा, उन्हें अभ्यास के दौरान ऐसी गेंदों का अधिक सामना करना चाहिए। थ्रोडाउन विशेषज्ञ को ऑफ स्टंप लाइन से लेग स्टंप लाइन की ओर लगातार बदलते रहना चाहिए।
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