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पहलगाम हमले के 9 महीने बाद फिर गुलजार हुआ दूधपथरी, स्थानीय लोग उत्साहित; पर्यटकों के खिले चेहरे

deltin33 3 hour(s) ago views 186
  

दूधपथरी खुलने से पर्यटक खुश। फोटो सोशल मीडिया



जागरण संवाददाता, श्रीनगर। अपने घर के छोटे से प्रांगण में रखे कपड़े के तंबू को साबुन से धोने के बाद मंजूर अहमद तांतरे व उसकी पत्नि इस तंबू को फरवरी की गुनगुनी धूप में सुखाने के लिए प्रांगण में लगी रस्सी जिस पर वह अक्सर कपड़े सुखाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, पर फैला रहे हैं।

प्रांगण के एक तरफ पर उन्होंने हांडियां, प्लेटें व कप भी धो कर रख दिए हैं और धूल मिट्टी से अटे गैस स्टोव को भी साफ कर साइड में रख दिया है जबकि रसोई गैस के दो तीन सिलेंडरों को भी रिफिल करवा लिया है। मध्य कश्मीर के बड़गाम जिले रहयार गांव के रहने वाले तांतरे के प्रांगण में ही नहीं, बल्कि गांव के हर दूसरे तीसरे घर के प्रांगण में इसी तरह का मंजर देखने को मिल रहा है।

प्रसिद्ध पर्यटनस्थल दूधपथरी से 5-6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव इस पर्यटनस्थल का एक मुख्य पड़ाव है और दूधपथरी गांव आने वाले र्पयटक इस गांव में जरूर ठहर पहले सुसता लेते हैं और चाय पकौड़े, मकई की रोटी, हाक साग, राजमाश की दाल व चावल के चटखारे लेने के बाद मनोरम दूधपथरी की तरफ रवाना हो जाते हैं।

इस गांव के अधिकांश लोग दूधपथरी की तरफ जाने वाले रास्ते पर अपने छोटे छोटे खानपान के स्टॉल लगा पर्यटकों को सर्व कर अपनी आजीविका कमाते हैं।

हालांकि, गत वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से दूधपथरी के लगातार बंद हो जाने के चलते रहयार तथा आसपास के अन्य गांवों जिनमें चक शेरा, कछपुरनी, मुजपथरी,कैछ,राइथन आदि गांवों के हजारों लोगों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हो गई थी। अलबत्ता गत दिनों प्रशासन द्वारा दूधपथरी समेत प्रदेश के बंद पड़े 14 र्पयटनस्थलों को दुबारा खोलने के बाद से उक्त लोगों में उत्साह है।

मंजूर अहमद तांतरे के चेहरे पर भी प्रशासन की इस घोषणा के बाद से रौनक लौट आई है। तांतरे ने अपनी खुशी जताते हुए कहा,शुक्र है कि अब दुधपथरी के दरवाजे टूरिस्टों के लिए फिर से खुल गए हैं। तांतरे ने कहा,यह 10 महीने हमने कैसे गुजारे, हम ही जानते हैं।

दूधपथरी के लिंक रोड़ पर खानपान का अपना छोटा सा स्टाल लगाने वाले तांतरे ने कहा,मैं बीते 7-8 बरसों से यह छोटा से स्टाल चला अपना रोजगार कमा रहा हूं। यह मेरी कमाई का एकमात्र साधन है। लेकिन पहलगाम घटना के बाद से न केवल मैं बलकि मेरी तरह ऐसे ही खानपान के स्टाल लगाने वाले हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे।

तांतरे ने कहा, मैं अपने और महारे आसपास के गांवों की बात करूं तो हम तरकीबन 10,000 से अधिक लोग इसी पर निर्भर है और इसी रोजगार से अपने परिवारों का पेट पालते हैं। तांतरे ने उपराज्यपाल का आभार जताते हुए कहा कि देर से ही सही लेकिन उन्होंने हमारे बारे में सोचा। हमारी परवाह की।

इधर वहां चाय की दुकानों के मालिकों, घोड़े वालों, गाइडों और छोटे व्यापारियों सहित स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया और पर्यटन गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

कई निवासियों ने कहा कि लंबे समय तक बंद रहने से उनकी आय बुरी तरह प्रभावित हुई है, क्योंकि इस क्षेत्र के अधिकांश परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन पर निर्भर हैं। दूधपथरी व्यू प्वाइंट पर चाय की दुकान करने वाले एक व्यक्ति नवाज अहमद ने कहा दूधपथरी फिर से खोलने के लिए हम स्थानीय सरकारी प्रशासन के बहुत आभारी हैं। नवाज ने कहा, पिछले 10 महीनों से हमारे पास आय का कोई स्रोत नहीं था। हमारी आजीविका पूरी तरह से पर्यटकों पर निर्भर है।

र्पयटन स्थल के बंद रहने से हमारा रोजगार प्रभावित हो गया था। नसीर अहमद नामक एक स्थानीय गाइड ने कहा कि इस फैसले से कई परिवारों में उम्मीद जगी है। नसीर ने कहा,हमारी कमाई तभी होती है जब पर्यटक आते हैं। फिर से खुलने से हमें अपनी आय में सुधार की उम्मीद है। हम प्रशासन को आश्वस्त करते हैं कि हम सभी नियमों का पालन करेंगे और पूरा सहयोग करेंगेl इधर र्पयटक भी इस र्पयटन स्थल के फिर से खुल जाने पर उत्साहित हैं।

महाराष्ट्र के एक दंपति, जो दोबारा खुलने के बाद दूधपथरी पहुंचने वाले पहले पर्यटकों में से थे, ने कहा कि वे इस पर्यटन स्थल को फिर से सुलभ देखकर बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, हम यहां सुरक्षित और बेहद खुश महसूस कर रहे हैं।

इस खूबसूरत जगह को दोबारा खोलने के लिए हम केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि माहौल शांतिपूर्ण है और सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक प्रतीत होती है। दिल्ली से आए संदीप नामक एक अन्य र्पयटक ने कहा, शुक्र है कि दूधपथरी खुल गई है और हम आज हम इस जन्नत का नजारा कर पा रहे हैं।

बता देते हैं कि दूधपथरी, श्रीनगर से लगभग 42 किलोमीटर दूर बड़गाम जिले में सिथत हैं और र्पयटकों के आर्कषण का केंद्र बनी हुई है।
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