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कनाडा में घटी विदेशी छात्रों की संख्या: 61% की आई कमी, इन नियमों का भरतीय छात्रों पर दिखा असर

deltin33 2 hour(s) ago views 729
  

कनाडा में विदेशी छात्रों की संख्या 61 प्रतिशत घटी सख्त नियमों का दिखा असर (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार द्वारा अस्थायी निवासियों (जिनमें छात्र भी शामिल हैं) की संख्या कम करने और आवास, बुनियादी ढांचे व सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव घटाने के लिए उठाए गए कदमों का असर अब साफ दिखने लगा है।

हालिया आंकड़ों में यह सामने आया है कि नए स्टडी परमिट जारी हाने की संख्या में करीब 61% की कमी आई है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजिस एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जहां 2 लाख 93 हजार 60 नए अंतरराष्ट्रीय छात्र आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 1 लाख 15 हजार 470 रह गई है।
कितनी हो गई संख्या?

दिसंबर 2024 में 29,835 नए छात्र पहुंचे थे जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 9665 रह गई। IRCC का कहना है कि अगस्त और दिसंबर में आमतौर पर ज्यादा स्टडी परमिट जारी होते हैं, क्योंकि इन्हीं महीनों में फॉल और विंटर सेमेस्टर शुरू होते हैं।

मासिक आंकड़ों में भी गिरावट देखी गई है। उदाहरण के लिए अप्रैल 2024 में 45 हजार 790 नए परमिट जारी हुए थे, जो अप्रैल 2025 में घटकर 8525 रह गए। अगस्त 2024 में 79 हजार 740 परमिट जारी हुए, जबकि अगस्त 2025 में 45 हजार 35 रह गए।
कनाडा सरकार ने कैप की तय

कनाडा सरकार ने 2024 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सालाना सीमा (कैप) तय की थी। इसके बाद 2025 और 2026 के लिए भी लक्ष्य कम कर दिए गए। पिछले साल घोषित 2025-2027 की योजना में 2026 के लिए 3.05 लाख छात्रों का लक्ष्य रखा गया था। अब नई 2026-2028 आव्रजन योजना में इसे घटाकर 1.55 लाख कर दिया गया है और अगले दो साल में इसमें हल्की और कमी होगी।

रेगुलेटेड कनाडियन इमिग्रेशन कंसल्टेंट मैथ्यू मैकडोनाल्ड ने कहा था कि 2026 के लिए लक्ष्य में 50% की कटौती बड़ी बात है। इससे कॉलेज और यूनिवर्सिटी कम एडमिशन ऑफर दे पाएंगे, जिससे कनाडा के शिक्षा क्षेत्र पर दबाव बढ़ेगा। सरकार का कहना है कि वह आव्रजन को \“सस्टेनेबल स्तर\“ पर लाना चाहती है और अस्थायी निवासियों की संख्या को कुल आबादी के 5% से नीचे रखना चाहती है।
भारतीय छात्रों पर असर

IRCC ने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम को भी सख्त किया है। अब एडमिशन लेटर की अनिवार्य जांच होती है। छात्रों के लिए फाइनेंशियल प्रूफ की राशि 10,000 कनाडाई डॉलर से बढ़ाकर 20,635 कनाडाई डॉलर कर दी गई है। पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के नियम भी कड़े किए गए हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत से 3.25 लाख स्टडी परमिट जारी किए गए थे, जिससे भारत सबसे बड़ा स्रोत देश बना हुआ था। नई नीति का असर भारतीय छात्रों पर भी पड़ा है। सिर्फ छात्रों ही नहीं, अस्थायी विदेशी कामगारों की संख्या में भी गिरावट आई है। 2024 में करीब 4 लाख नए वर्कर आए थे, जो 2025 में घटकर 2.09 लाख रह गए।
स्थायी निवास पर सरकार का फोकस

सरकार का कहना है कि वह ऐसे लोगों को स्थायी निवासी बनाने पर जोर दे रही है जो पहले से कनाडा में रहकर पढ़ाई या काम कर रहे हैं। 2025 में 1.88 लाख से ज्यादा पूर्व अस्थायी निवासियों को स्थायी निवास (PR) मिला, जो उस साल के कुल नए PR का लगभग 48% था।

ये लोग आमतौर पर कनाडा में पढ़ाई और काम का अनुभव रखते हैं और एक्सप्रेस एंट्री व प्रांतीय नामांकन जैसे आर्थिक कार्यक्रमों के जरिए PR के लिए आवेदन करते हैं। सरकार का कहना है कि इससे एक तरफ बुनियादी ढांचे पर दबाव कम होगा और दूसरी तरफ देश को कुशल और योग्य लोग भी मिलते रहेंगे।

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