AI Impact Summit 2026: भारतीय साफ्टवेयर कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सर्विसेज ऑफर करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने 18 फरवरी को यह कहा। उन्होंने कहा कि इंडियन आईटी सेक्टर एआई आधारित सर्विसेज मॉडल की तरफ बढ़ रहा है। दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से इतर उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में कई अहम बातें बताईं।
एआई का फायदा उठाने के लिए पुरान सिस्टम्स को अपग्रेड करना होगा
वैष्णव ने कहा कि ग्लोबल कंपनियां सैकड़ों और हजारों पुराने आईटी सिस्टम्स का इस्तेमाल कर रही हैं। मॉडर्न आईटी मॉडल्स की क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए इन सिस्टम्स को अपग्रेड करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “आईटी कंपनियां एआई आधारित सर्विसेज मॉडल की तरफ बढ़ रही हैं।“ उन्होंने ये बातें तब कहीं, जब एआई टूल्स की बढ़ती क्षमता की वजह से आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आ रही है।
आईटी टूल्स की बढ़ती क्षमता का असर आईटी कंपनियों पर
दुनियाभर में आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हुई है, जिससे आईटी कंपनियों की वैल्यूएशंस में 20 अरब डॉलर से ज्यादा कमी आई है। इसकी वजह एआई का बढ़ता इस्तेमाल है। एआई फर्म एंथ्रोपिक के नए क्लाउडे प्लगइन लॉन्च करने के बाद आईटी कंपनियों में बिकवाली शुरू हो गई। इनवेस्टर्स को डर है कि एआई टूल्स का बढ़ता इस्तेमाल आईटी कंपनियों की ट्रेडिशनल आईटी सर्विसेज की डिमांड को कम कर देगा।
एआई का खराब असर नौकरियों के मौकों पर नहीं पड़ेगा
AI Summit में वैष्णव ने एआई के इस्तेमाल से नौकरियों के मौकों में कमी के डर को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव में सबसे जरूरी वर्कफोर्स की अपस्किलिंग और रीस्केलिंग है। उन्होंने कहा कि ये दोनों चीजें पहले से चल रही हैं। इंडस्ट्री, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और सरकार मिलकर अपस्किलिंग और रीस्केलिंग को अंजाम दे रहे हैं। पुराने सॉफ्टेवयर को एआई के हिसाब से आधुनिक बनाने की जरूरत की वजह से आईटी फर्मों के लिए बड़े मौके बनेंगे।
एआई की ताकत के बारे में पूरी दुनिया की सोच एक जैसी
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि बड़े बदलाव की एआई की ताकत के बारे में दुनिया की सोच एक है। उन्होंने टेक्नोलॉजी के व्यापक असर को देखते हुए साइबर रिस्क और इसके दुरुपयोग को रोकने में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। इससे पहले 17 फरवरी को इंफोसिस के को-फाउंडर और चेयरमैन नंदल निलेकणी ने एआई के इस्तेमाल से जुड़े डर को दूर करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था टैक्नोलॉजी को नौकरियों के मौके खत्म करने की जगह क्षमता बढ़ाने वाले टूल के रूप में देखना चाहिए।