मप्र के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश धीरे-धीरे ही सही, पर विकसित राज्य के रास्ते पर चल पड़ा है। वर्ष 2025-26 में विकास दर 11.14 प्रतिशत रही। इस वृद्धि के साथ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपये अनुमानित है। यह वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15,02,428 करोड़ रुपये था। प्रदेश की यह मजबूत वृद्धि दर साबित कर रही है कि राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावशाली दर से बढ़ रही है।
अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र कृषि का सर्वाधिक योगदान 43.09 प्रतिशत बना हुआ है। वहीं, अधोसंरचना विकास और उद्योग मित्र वातावरण के कारण बढ़ते निवेश से आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। प्रति व्यक्ति शुद्ध आय में भी उल्लेखनीय उछाल आया है, जो जीवन स्तर में सुधार को दर्शाता है।
वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बजट से एक दिन पहले मंगलवार को प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रस्तुत की।
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुख्य तथ्य
- प्रति व्यक्ति आय 14,926 रुपये की वृद्धि के साथ सालाना 1,69,050 रुपये हो गई। जो वित्तीय वर्ष 2011-12 में मात्र ₹38,497 थी।
- कृषि, पशुपालन, पर्यटन, उद्योग से लेकर हर क्षेत्र में वृद्धि परिलक्षित हुई।
कृषि उत्पादन में 7.99 प्रतिशत की वृद्धि
प्रदेश की अर्थव्यवस्था अभी भी कृषि आधारित है। इसका योगदान 43.09 प्रतिशत है। फसल उत्पादन में 7.99 प्रतिशत की वृद्धि हुई परंतु क्षेत्रफल में 2.48 प्रतिशत की कमी रही। खाद्यान्न फसलों में 4.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण उत्पादन 14.68 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, दलहन उत्पादन में 21.90 और तिलहन उत्पादन में 5.27 प्रतिशत की कमी रही। इसका कारण फसल चक्र परिवर्तन के साथ वर्षा की असमानता और किसानों का वाणिज्यिक फसलों की ओर बढ़ता रुझान रहा। कृषि क्षेत्र में वृद्धि का बड़ा आधार उद्यानिकी फसलें बनीं। इसका क्षेत्र 27.29 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.39 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। वहीं, उत्पादन 409 लाख टन से बढ़कर 425 लाख टन हो गया। दुग्ध उत्पादन 5.95 प्रतिशत वृद्धि के साथ 225.95 लाख टन हुआ। प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम प्रतिदिन रही।
9.93 प्रतिशत की दर से औद्योगिक विकास
प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर बनाए गए वातावरण का परिणाम हमारी अर्थव्यवस्था यानी जीएसडीपी में देखने को मिल रहा है। 9.93 प्रतिशत की वृद्धि दर निर्माण और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में हो रही है।
पौने दो लाख लोगों को मिला रोजगारः वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,028 औद्योगिक इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई जिसके अंतर्गत 1,17,417 करोड़ रुपये का निवेश हुआ जिससे 1,77,328 को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
साढ़े आठ लाख करोड़ का निवेश आयाः बीते एक वर्ष में 30.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें से 8.57 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव साकार हो चुके हैं।
327 करोड़ रुपये का एफडीआई : जनवरी से सितंबर, 2025 के बीच प्रदेश में कुल 327.34 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) प्राप्त हुआ। इसमें इंदौर में 135.58, उज्जैन में 77.71 और भोपाल में 58.52 करोड़ रुपये का निवेश आया।
निर्यात में छह प्रतिशत की वृद्धि : निर्यात छह प्रतिशत की वृद्धि के साथ अक्टूबर 2025 तक 38,550 करोड़ रुपये की वस्तुओं का निर्यात किया गया। इसमें औषधि एवं कृषि उत्पाद के साथ इंजीनियरिंग वस्तुएं, टेक्सटाइल और खनिज आधारित उत्पाद शामिल हैं।
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अर्थव्यवस्था में सुधार के तीन कारण
- कृषि अभी भी हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
- वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष घोषित करने से निवेश और रोजगार में वृद्धि हुई।
- सड़क, बिजली और सिंचाई जैसे बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत व्यय बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां तेज हुईं।
राजस्व आधिक्य की स्थिति
राज्य लगातार राजस्व आधिक्य की स्थिति में है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 4,815 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 618 रुपये राजस्व अधिक रहने की उम्मीद है। राज्य के करों का हिस्सा जीएसडीपी में 6.39 प्रतिशत हो गया। अधोसंरचना विकास के लिए पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि की जा रही है। यह 27 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2025-26 में 82,513 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। जीएसडीपी ऋण अनुपात बढ़कर 31.30 प्रतिशत हो सकता है। |