पीएम मोदी इजरायल का दौरा करेंगे। (पीटीआई)
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को जबरदस्त धार देना शुरू कर दिया है।
मंगलवार को एक तरफ भारत अपने एक प्रमुख रक्षा साझेदार देश फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग के अगले पांच वर्षों के रोडमैप को अंतिम रूप दिया है तो दूसरी तरफ एक अन्य रक्षा साझेदार देश इजरायल के साथ एक बहुत ही अहम रक्षा समझौता करने की तैयारी है जो बेहद संवेदनशील प्रौद्योगिकी से जुड़ी है। इस बारे में समझौता अगले हफ्ते पीएम नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान होने की संभावना है।
इजरायल के नई दिल्ली में राजदूत रुवेन अजार ने दैनिक जागरण के साथ एक विशेष बातचीत में इस बात की तरफ संकेत दिए। उन्होंने कहा कि, “पीएम मोदी और राष्ट्रपति बेंजामिन नेतान्याहू मिलते हैं तो कुछ अच्छी चीजें निकलती हैं, इस बार भी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा बहुत ही सफल रहने वाली है।\“\“
पीएम मोदी करेंगे इजरायल का दौरा
पीएम मोदी की इजरायल यात्रा की आधिकारिक घोषणा अगले दो-तीन दिनों के भीतर होने की संभावना है लेकिन दोनों देशों के अधिकारी इस दौरान होने वाली घोषणाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। राजदूत अजार ने संकेत दिया कि इस यात्रा के दौरान रक्षा और कारोबार क्षेत्र में सहयोग दो सबसे अहम मुद्दे होंगे। खास तौर पर रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता होने जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच अधिक संवेदनशील तकनीकों के आदान-प्रदान और संयुक्त विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने कहा, “हमारे संबंधों में जो क्रांतिकारी बदलाव आया है, उसका उच्चतम स्तर प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान देखने को मिलेगा। यह यात्रा अत्यंत सफल रहने वाली है, क्योंकि हम कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम कर रहे हैं। हम अपने संबंधों को और गहरा और व्यापक बनाने जा रहे हैं।\“\“
2017 के बाद पहली इजरायल यात्रा
भारतीय प्रधानमंत्री की यह वर्ष 2017 के बाद पहली इजरायल यात्रा होगी। पीएम बेंजामिन नेतान्याहू जनवरी, 2018 में नई दिल्ली आये थे। उसके बाद कम से कम दो बार उनकी भारत यात्रा की तैयारियां की गई हैं लेकिन अंतिम समय में किसी न किसी वजह से उन्हें रद करना पड़ा। हालांकि इसका द्विपक्षीय संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है।
इजरायली राजदूत के अनुसार, “प्रस्तावित समझौते के बाद दोनों देश केवल रक्षा उपकरणों की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नई परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से काम करेंगे। इसमें ऐसी संवेदनशील प्रौद्योगिकियां भी शामिल होंगी, जो अब तक द्विपक्षीय संबंधों का हिस्सा नहीं रही हैं।\“\“
निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के लिए नए तंत्र विकसित
अजार ने यह भी स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में सरकारी स्तर के साथ-साथ निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के लिए नए तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। “हम ऐसे तंत्र विकसित कर रहे हैं, जो विश्वास और गोपनीयता को सुनिश्चित करेंगे, ताकि सरकारों और निजी क्षेत्र के बीच अधिक संवेदनशील तकनीकों पर सहयोग संभव हो सके।\“\“ रक्षा के अलावा दोनों देश उभरती प्रौद्योगिकियों पर भी गहन सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
वर्ष 2020 में चीनी सेना की तरफ से पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को खास तौर पर तेज कर दिया है। पिछले हफ्ते ही भारत सरकार की एक उच्चस्तरीय समिति ने फ्रांस से 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल युद्धक विमान खरीदने का समझौता किया है।
भारत और फ्रांस के रक्षा मंत्रियों के बीच छठी वार्षित वार्ता
आज बेंगलुरु में भारत और फ्रांस के रक्षा मंत्रियों के बीच छठी वार्षित वार्ता हुई है जिसमें अगले पांच वर्षों के दौरान रक्षा सहयोग के एजेंडे को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। नवंबर, 2025 में अमेरिकी सरकार ने भारत को जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रेसिजन आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल्स बेचने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई है।
इसी बीच पिछले एक दशक में इजरायल भारत का सबसे भरोसेमंद रक्षा साझेदार के तौर पर स्थापित हो चुका है। पीएम मोदी के दौरान रक्षा क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच होने वाली घोषणाओं पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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