दिल्ली नगर निगम में विपक्षी पार्षदों ने आयुक्त की शक्ति बढ़ाने का किया विरोध।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में पार्षद अपने ही आयुक्त की शक्ति बढ़ाने के विरोध में आ गए हैं। सोमवार को हुई निगम सदन की बैठक में विपक्षी आप पार्षदों ने इसका विरोध किया। साथ ही सदन में महापौर के आसन के पास पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।
इसके बाद हंगामा बढ़ता देख बैठक की अध्यक्षता कर रहे उप महापौर जय भगवान यादव ने विपक्षी पार्षदों से सदन के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। लेकिन जब भी हंगामा नहीं रुका तो हंगामे के बीच प्रस्तावों को पारित किया गया।
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने दिल्ली सरकार द्वारा निगम को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार निगम को पंगु बनाने पर तुली हुई है। एमसीडी एक्ट के अनुसार निगमायुक्त की शक्ति बढ़ाने का प्रस्ताव सदन से पारित होना चाहिए था फिर दिल्ली सरकार द्वारा लागू किया जाना चाहिए था। लेकिन पार्षदों की शक्तियों पर अतिक्रमण करके दिल्ली सरकार ने इसे सीधे जारी कर दिया।
उन्होंने कहा कि निगमायुक्त की शक्ति पहले पांच करोड़ तक की थी लेकिन दिल्ली सरकार ने इसे 50 करोड़ कर दिया है। इससे स्थायी समिति जो की निगम की सबसे शक्तिशाली समिति थी वह कमजोर हो गई है। अब ज्यादातर प्रस्ताव सीधे निगमायुक्त द्वारा ही पारित कर दिए जाएंगे। क्योंकि 50 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाएं गिनी चुनी होती है। उन्होंने कहा कि यह निगम के साथ दिल्ली सरकार ने धोखा किया है। दिल्ली सरकार निगम पर अतिक्रमण करना चाहती है। इसलिए लोकनिवास से यह निगमायुक्त की शक्ति बढ़ाने का प्रस्ताव निकलवाया है।
अंकुश नारंग ने कहा कि एमसीडी एक्ट 1957 के सेक्शन 202 सब-सेक्शन (सी) के अनुसार,आयुक्त के किसी भी प्रस्ताव के लिए वित्तीय सीमा 5 करोड़ रुपये निर्धारित है। 5 करोड़ से 50 करोड़ करने के लिए एमसीडी एक्ट में संशोधन करना पड़ता है, लेकिन बिना संशोधन किए एक प्रशासनिक आदेश निकालकर इसे बढ़ा दिया गया। हालांकि नेता सदन प्रवेश वाही ने नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि इससे विकास के कार्यों की रफ्तार बढ़ेगी। इसलिए दिल्ली सरकार ने यह जनहितेषी निर्णय लिया है।
सीएनजी और बिजली से अंतिम संस्कार मुफ्त करेगा निगम
दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एमसीडी ने प्रयोगिक तौर पर सीएनजी और बिजली से अंतिम संस्कार को दो साल के लिए निश्शुल्क करने का निर्णय लिया है। अभी फिलहाल 10 प्रतिशत ही इन सीएनजी और बिजली से अंतिम संस्कार के लिए उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में निगम ने लकड़ी की बजाय बिजली और सीएनजी से अंतिम संस्कार को प्रोत्साहित करने के लिए यह निर्णय लिया है।
इसके तहत एनजीओ को 500 रुपये बिजली तो वहीं सीएनजी से अंतिम संस्कार के लिए 1500 रुपये का भुगतान निगम शवदाह गृह चलाने वाले एनजीओ को करेगा। इससे निगम को दो वर्ष में 2.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ होगा। निगम के अनुसार प्रयोग सफल रहता है और लोग लकड़ी से अंतिम संस्कार की बजाय सीएनजी और बिजली से अंतिम संस्कार के लिए आगे आते हैं तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
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