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जंगमबाड़ी मठ में दो दिवसीय जगद्गुरु विश्वाराध्य जयंती महोत्सव प्रारम्भ, विद्वानों का सम्मान

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जंगमबाड़ी मठ वाराणसी में जगद्गुरु विश्वाराध्य जयंती महोत्सव का भव्य शुभारंभ, विद्वानों का सम्मान।  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। महाशिवरात्रि पर्व शैव समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है, विशेषकर वीरशैव मतावलम्बियों के लिए। जगद्गुरु पंचाचार्यों ने पाँच प्रमुख पीठों की स्थापना की है, जिनमें से काशी में \“ज्ञानपीठ\“ की स्थापना जगद्गुरु विश्वाराध्य ने की थी। इसी परंपरा के तहत प्रतिवर्ष विश्वाराध्य जयंती महोत्सव का आयोजन काशी के प्रसिद्ध जंगमवाड़ी मठ में धूमधाम से किया जाता है।

इस वर्ष का दो दिवसीय महोत्सव शनिवार को प्रारम्भ हुआ। पहले दिन सुब‍ह सात बजे मठ के महंतद्वय 1008 जगद्गुरु डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी एवं 1008 जगद्गुरु मल्लिकार्जुन शिवाचार्य महास्वामी द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद दोपहर में वेदांत विषय पर \“स्वप्रकाशकत्व विचार:\“ सूत्र पर विद्यार्थियों के बीच शास्त्रार्थ का आयोजन किया गया।

दोपहर में ही विद्वत सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र को जगद्गुरु विश्वाराध्य विश्वभारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय की डॉ. पूजा मनमोहनोपाध्याय को कोडीमठ संस्कृत साहित्य पुरस्कार तथा सारनाथ स्थित केंद्रीय तिब्बती उच्च संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. गेशे लोबसंग दोर्जे रबलिंग और आचार्य व्रजवल्लभ द्विवेदी को शैवभारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस समारोह में सिंधु सुभाष मातृशक्ति, शिवलीला पाटिल, और कवि दमदार बनारसी को जयदेव श्री हिन्दी साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही, सम्पदकाचार्य सम्मान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डा. आनंद कुमार जैन को दिया गया।

आशीर्वाद प्रदान करते हुए डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी ने ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भक्ति और शक्ति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने समाज और मानवता के कल्याण के लिए वैदिक परंपराओं के संरक्षण को आवश्यक बताया। स्वामी जी ने जीवन में सफलता के लिए \“भजन और भोजन\“ के महत्व को समझाया और भक्तों को सत्संग से जुड़ने का आशीर्वाद दिया।

डॉ. मल्लिकार्जुन विश्वाराध्य शिवाचार्य महास्वामी ने अपने संबोधन में सभी पूजा स्थलों को ईश्वर के घर बताते हुए समावेशी दृष्टिकोण की बात की। इस अवसर पर कर्नाटक के डॉ. शिवानन्द शिवयोगी, डॉ. बसवराज जयचंद्र स्वामी, राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक और संस्कृत के विद्वान उपस्थित थे। सभा का कुशल संचालन काशी पंडित सभा के मंत्री डॉ. विनोद राव पाठक ने किया। सम्मानित विद्वानों ने मठ के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की।
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