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अर्मापुर पीजी कालेज में हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते बालीवुड अभिनेता व साहित्यकार अखिलेंद्र मिश्रा । प्रबंधन
जागरण संवाददाता, कानपुर। अभिनेता अखिलेंद्र ने जेल में बंद हास्य अभिनेता राजपाल यादव की परेशानियों को लेकर कहा कि उनके लिए यह बुरा समय है। जल्द ही टल जाएगा। उनका अपना एक अलग ही निखरा हुआ व्यक्तित्व है। वह जहां भी रहते हैं, लोगों को हंसाते रहते हैं। मेरी शुभकामनाएं हैं उनके साथ है। वह एक बेहतरीन इंसान और कमाल के अभिनेता हैं। सबसे अद्भुत बात तो यह है कि वह जेल में रहकर भी वहां कैदियों को हंसा रहे हैं। वे अर्मापुर पीजी कालेज में शुक्रवार को हिंदी विभाग की ओर से हिंदी साहित्य में राष्ट्रीय सरोकार : काव्य के विशेष संदर्भ में विषय पर दाे दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित किया।
संगोष्ठी को बालीवुड अभिनेता व साहित्यकार अखिलेंद्र मिश्रा सहित प्रबुद्धजनों ने संबोधित किया। अभिनेता अखिलेंद्र ने मीडिया से संवाद के दौरान भाषा और राजनीति के बीच टकराव के सवाल पर कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले राज्यों को बांटा गया और अब भाषा के आधार पर दीवारें खड़ी हो गई हैं। अब राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि लोग धीरे धीरे जाति पर आ गए हैं और जाति के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है। मेरा मानना है कि भाषा से ही इंसान के व्यक्तित्व का निर्माण होता है और भाषा से ही देश का निर्माण होता है।
उन्होंने राजनेताओं और समाज के लोगों के लिए संदेश दिया किया कि भाषा पर राजनीति न करते हुए इसके संरक्षण और मर्यादा का विशेष ध्यान रखें। यहां आयुध निर्माणी कानपुर के मुख्य महाप्रबंधक आलोक कुमार, प्रोफेसर विवेक द्विवेदी, हिंदी केंद्रीय निदेशालय के निदेशक प्रोफेसर हितेंद्र मिश्र, प्राचार्य प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. गरिमा जैन, डा. राजेश कुमार सिंह सहित स्टाफ सदस्य व विद्यार्थी मौजूद रहे।
बालीवुड में बदलाव को लेकर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बदलाव केवल सोच और व्यवहार का है। वर्तमान समय में सतोगुण और रजोगुण की बजाय तमोगुण (तामसिकता) ज्यादा बढ़ा है। इसका सीधा असर सिनेमा पर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशंसकों को जल्द ही ओटीटी प्लेटफार्म पर फिल्म बंसल मर्डर : रात अकेली है 2 और पिरामिड में अभिनय देखने को मिलेगा। इसके अलावा फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर आधारित बोस : द बिगेस्ट अंडरकवर एवर में अभिनय किए हैं। यह अनुज धर की किताब पर आधारित है और उनकी गुमनामी के अनछुए पहलुओं को फिल्म में दिखाया गया है। |
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