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मोदी सरकार ने सरेंडर कर दिया, Indo-US ट्रेड डील पर भड़का विपक्ष, कहा- संसद में हो चर्चा

deltin55 1 hour(s) ago views 5

               
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के लिए रूपरेखा पर सहमति बन गई है. दोनों देशों ने इस डील को लेकर साझा बयान भी जारी कर दिया, जिसके मुताबिक अमेरिका, भारतीय सामान पर जवाबी शुल्क को पहले के 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा तो वहीं भारतीय निर्यातकों, खासकर MSME, किसानों और मछुआरों के लिए 30,0000 अरब डॉलर का बड़ा बाजार खुलेगा. हालांकि इस रूपरेखा पर विपक्ष ने निशाना साधा और कहा कि मोदी सरकार ने सरेंडर कर दिया, साथ में सवाल किया कि क्या सरकार ने अपने उद्योग और कृषि क्षेत्र अमेरिका के लिए खोल दिया है.


कांग्रेस सांसद ने मनीष तिवारी ने ट्रेड डील को लेकर भारत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “क्या 6 फरवरी को जारी किए गए भारत-अमेरिका के साझा बयान का मतलब यह है कि भारत ने बिना किसी रोक-टोक के अपने उद्योग और कृषि सेक्टर को पूरी तरह से अमेरिका के लिए खोलने पर सहमति दे दी है? ऐसा लगता है कि औद्योगिक सेक्टर को पूरी तरह से खोल दिया गया है और कृषि के मामले में भी जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, वे ‘शामिल हैं’ न कि ‘तक सीमित’.”


        


उन्होंने मांग करते हुए कहा, “इस संसद में पूरी चर्चा होनी चाहिए कि भारत सरकार ने असल में किस बात पर सहमति दी है, क्योंकि इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं, यह देखते हुए कि भारत ने 2026 के फाइनेंस बिल में कई टैरिफ लाइनों पर पहले ही एकतरफा बड़ी रियायतें दे रखी है.”






कांग्रेस सांसद कहते हैं, “भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक सामानों और अमेरिकी खाने-पीने तथा कृषि के जुड़े उत्पादों की एक बड़ी रेंज पर टैरिफ खत्म करेगा या कम करेगा, जिसमें ड्राइड डिस्टिलर ग्रेन (DDGs), जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार (Red Sorghum), ट्री नट, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट, और दूसरे अन्य कई प्रोडक्ट्स शामिल हैं.”



डील को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता और घोसी से सांसद राजीव राय ने निराशा जताते हुए कहा कि अमेरिका-भारत का संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ. ये सिर्फ हमारे हितों का ही नहीं देश के सम्मान से भी समझौता हुआ है. डील में किसानों की बर्बादी लिखी गई है.




उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका के कृषि उत्पादों समेत कई वस्तुओं पर भारत में कोई टैक्स नहीं लगेगा जबकि अमेरिका भारत से 18 परसेंट टैक्स लेगा. अब तक की कमजोर सरकारें अमेरिका से भारी टैक्स वसूलती थीं और बदले में कोई टैक्स नहीं या नगण्य टैक्स ही दिया करता देती थीं, 56 इंच वाली सरकार ने अपने मई डियर फ्रेंड ट्रंप को सब कुछ दे दिया. अब ताली नहीं बजाओगे ?”


शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस डील पर नाराजगी जाहिर की और X पर अपने पोस्ट में कहा, “भारत और अमेरिका ने एक साझा बयान जारी किया है. मैं फिर से कहूंगी कि यह बातचीत का नतीजा नहीं है, बल्कि अमेरिका के आदेश का नतीजा है जिसे भारतीय सरकार ने मानने पर सहमति जताई. इसमें ज्यादातर वही चीजें हैं जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही ट्रुथ सोशल पर कह चुके हैं.”




उन्होंने भी सवाल उठाते हुए कहा, “भारत अमेरिका के कई तरह के खाने और कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म करेगा या कम करेगा.”



वहीं इस डील को लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “भारतीय किसान अमेरिकी उत्पादों की क्वालिटी और कीमत का मुकाबला नहीं कर पाएंगे. इस समझौते में कई बातें शामिल हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि भारत सरकार रूस से तेल नहीं खरीदने को लेकर राजी हो गई है. इसलिए, सस्ते रूसी तेल की जगह, हम वेनेजुएला और अमेरिका से तेल लाएंगे, साथ ही ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बहुत ज्यादा होगा, और हमारी रिफाइनरी खाड़ी देशों और रूसी तेल के लिए कैलिब्रेटेड हैं. लेकिन हमारी मशीनरी वेनेजुएला से आने वाले तेल या अमेरिका से आने वाले तेल के लिए कैलिब्रेटेड नहीं है, जो बहुत दूर से आएगा, जिससे यह बहुत महंगा हो जाएगा.”

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