चीनी मिल की राख से बन रही ईंट।
आलोक त्रिवेदी, संदना (सीतापुर)। चीनी मिलों से निकलने वाली राख प्रदूषण का बड़ा कारण होती है। इसका पर्यावरण के अनुकूल व सुरक्षित उपयोग करने की पहल डालमिया चीनी मिल रामगढ़ ने की है। चीनी मिल ने राख से ईंट तैयार करने का प्रयोग किया है। इससे पर्यावरण के संरक्षण में मदद मिल रही है। राख से बनी ईंट मिट्टी व सीमेंट से तैयारी की जाने वाली ईंटों के मुकाबले अधिक मजबूत है। किसानों को सस्ती दर पर मिल रही है।
रामगढ़ चीनी मिल की पेराई क्षमता 85 हजार टन क्विंटल प्रतिदिन है। मिल में चीनी उत्पादन, बिजली उत्पादन होता है। ब्वायलर से प्रतिदिन करीब 30 टन राख निकलती है। अभी तक मिल से निकलने वाली राख का निस्तारण गड्ढा पटान के लिए किया जाता था। लोग राख को खाली स्थानों में डालते हैं।
राख का निस्तारण चीनी मिल के लिए भी चुनौती बन गया था। इस राख में कई तरह के रासायनिक पदार्थों का मिश्रण होने से यह मिट्टी के लिए खतरनाक साबित हो रही थी। अक्सर लोग राख से प्रदूषण फैलने को लेकर शिकायत भी करते थे।
इसको लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी कड़ी निगरानी कर रहा था। राख के निस्तारण की समस्या को लेकर मिल भी असहज महसूस कर रहा था।
चीनी मिल में राख से ईंट बनाने के लिए हाइड्रोलिक प्रेस की व्यवस्था की गई। ब्वायलर से निकली राख में एक अनुपात में पत्थर की रेत व सीमेंट मिलाकर हाइड्रोलिक प्रेस में ईंट तैयार की जा रही है। पानी का छिड़काव कर ईंटों को मजबूती दी जाती है। मशीन में ईंट व टाइलें बनाकर उत्पादन किया जा रहा है। इनकी गुणवत्ता अच्छी है।
मजबूती के साथ-साथ इनमें सीलन का प्रभाव नहीं होता है। यह ईंट मिट्टी व सीमेंट से तैयारी होने वाली ईंट के मुकाबले काफी टिकाऊ हैं। प्रति ईंट तैयारी करने में लगभग छह रुपये की लागत आ रही है।
चीनी मिल प्रतिदिन 10 हजार से ईंटों का उत्पादन होता है। इसे गन्ना किसानों को छह रुपये प्रति ईंट के हिसाब से ही बेचा जा रहा है। इसकी बिक्री से भी चीनी मिलों को मुनाफा हो रहा है। वहीं किसानों को सस्ती दर पर मजबूत ईंट मिल रही है।
चीनी मिल में निकलने वाली राख से ईंट बनाकर पर्यावरण के अनुकूल उपयोग किया जा रहा है। इससे राख का निस्तारण हो रहा है, किसानों को सस्ती दर पर ईंट मिल रही है। -उमाकांत पाठक, वरिष्ठ महाप्रबंधक, रामगढ़ चीनी मिल। |
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