रुहेलखंड विश्वविद्यालय
जागरण संवाददाता, बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की मिलती-जुलती वेबसाइटें और इंटरनेट मीडिया अकाउंट अब तक पूरी तरह से बंद नहीं हो पाए हैं। इससे छात्र धोखा खा रहे हैं। इनका संचालन करने वाले कई तो छात्रों से ठगी भी कर रहे हैं। गूगल पर सर्च करने पर रुवि की असली वेबसाइट से पहले इनके लिंक आते हैं। एक मामले में रिपोर्ट दर्ज कराकर वेबसाइट बंद कराई थी।
अब एक और वेबसाइट रुवि के अधिकारियों ने पकड़ी है। इस संबंध में कुलसचिव को भी सूचित किया है, ताकि इसे पुलिस से शिकायत कर बंद कराया जा सके। दिसंबर में चीफ प्राक्टर प्रो. रवेंद्र कुमार ने कुछ सूचनाएं वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए संबंधित विभाग को दी थीं, लेकिन सूचना प्रदर्शित नहीं हुईं।
उन्होंने पता किया तो मालूम हुआ कि रुवि से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाई गई। अधिकारियों को सूचना दी तो डीएम व एसएसपी से शिकायत की गई। थाना बारादरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले में थाना पुलिस ने उत्तराखंड के उधमसिंह नगर निवासी सुजय राय को गिरफ्तार किया था। उसने पूछताछ में बताया कि वेबसाइट का इस्तेमाल फर्जी वीजा बनवाने में किया जाता था।
इस मामले में एक और साथी का नाम सामने आया था, लेकिन पुलिस उसे अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। अब सामने आया है कि अभी भी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से मिलती-जुलती वेबसाइटें चल रही हैं। एक वेबसाइट पर लिखा है कि यह अधिकारिक नहीं है, लेकिन इसका नाम रुवि की वेबसाइट से मिलता-जुलता है।
सही सूचना न मिलने से छूट जाती है परीक्षा
इन मिलती-जुलती वेबसाइट और इंटरनेट मीडिया अकाउंट को छात्र असली समझ लेते हैं और इन पर पड़ी सूचनाओं को सही मान लेते हैं, इसकी वजह से कई बार उनकी परीक्षा भी छूट जाती हैं। छात्र विश्वविद्यालय में जाकर शिकायत करते हैं, कि उन्हें कोई सूचना ही नहीं मिली।
एक फर्जी वेबसाइट के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें गिरफ्तारी भी हुई है। कई इंटनेट मीडिया अकाउंट भी बंद कराए गए हैं। अन्य की सूचना मिली है, जिन्हें बंद कराने की तैयारी है।
- डा. अमित सिंह, मीडिया प्रभारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय
फर्जी वेबसाइट मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरा फरार चल रहा है। जांच जारी है। और भी वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट मिलेंगे तो उन्हें बंद कराया जाएगा।
- धनंजय पांडेय, थाना प्रभारी बारादरी
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