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Punjab News: पूर्व विधायक हरमीत सिंह को हाईकोर्ट से झटका, धोखाधड़ी और दुष्कर्म मामले में नहीं मिली राहत; 28 जनवरी तक टली सुनवाई

LHC0088 1 hour(s) ago views 888
  

पूर्व विधायक हरमीत सिंह को हाईकोर्ट से झटका



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सनौर (पंजाब) के पूर्व विधायक हरमीत सिंह पठान माजरा को धोखाधड़ी और दुष्कर्म मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने गिरफ्तारी वारंट और भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई को चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई 28 जनवरी तक स्थगित कर दी।

माजरा ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित हनी ट्रैप बताया है, जबकि शिकायतकर्ता ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार को हाईकोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने मामले की सुनवाई करते हुए किसी भी तरह की राहत न देते हुए मामले की सुनवाई 28 जनवरी तक स्थगित कर दी। माजरा ने न केवल इन आदेशों को रद्द करने की मांग की थी, बल्कि मामले के लंबित रहने तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया था।

यह मामला शिकायतकर्ता गुरप्रीत कौर द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जो पटियाला के सिविल लाइंस थाने में दर्ज की गई। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2013-14 में फेसबुक के माध्यम से संपर्क के बाद पठान माजरा ने खुद को तलाकशुदा बताकर शादी का झांसा दिया।

आरोप है कि इसी विश्वास के आधार पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने और बाद में 14 अगस्त 2021 को लुधियाना स्थित एक गुरुद्वारे में विवाह किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें पठान माजरा की पहली शादी की जानकारी तब हुई, जब 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान दाखिल हलफनामे में उन्होंने सिमरनजीत कौर को अपनी पत्नी बताया।

पुलिस की अर्जी पर पटियाला की अदालत ने 5 सितंबर और 11 सितंबर 2025 को पठान माजरा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। इसके बाद, जेएमआईसी पटियाला की अदालत ने 20 दिसंबर 2025 को उन्हें उद्घोषित व्यक्ति (भगोड़ा ) घोषित कर दिया।

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में पठान माजरा ने कहा है कि वह वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं और उन्हें पुलिस की ओर से कोई विधिवत नोटिस नहीं मिला। उनका तर्क है कि जब उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं न्यायालय में लंबित थीं, उस दौरान उद्घोषणा की कार्यवाही करना कानूनी अनुचित और प्रक्रिया का उल्लंघन है।

उन्होंने यह भी दलील दी है कि जांच पूरी हुए बिना और चालान पेश किए जाने से पहले इस तरह की कठोर कार्यवाही उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। अपने बचाव में पठान माजरा ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसे हनी ट्रैप का मामला करार दिया है।

उनका दावा है कि पहली पत्नी और शिकायतकर्ता दोनों की सहमति से दूसरी शादी हुई थी। साथ ही, विधायक बनने के बाद शिकायतकर्ता द्वारा कथित तौर पर ब्लैकमेल किए जाने और एक करोड़ रुपये व एक फ्लैट की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

पूर्व विधायक ने उच्च न्यायालय से प्रार्थना की है कि उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा आदेशों को रद्द किया जाए, साथ ही याचिका के लंबित रहने तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
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