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बहन की बरात आने से पहले घर में बिछ गई लाश; कोहरे के कारण गाजियाबाद में भीषण हादसा, एक की मौत

cy520520 Yesterday 20:26 views 33
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



संवाद सहयोगी, जागरण, स्वार (रामपुर)। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर शुक्रवार रात घने कोहरे के बीच गाजियाबाद जिले के डासना के पास हादसा हो गया। रोहतक (हरियाणा) से स्वार लौट रहे युवकों की कार डिवाइडर पर चढ़कर पलट गई। हादसे में युवक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए।

नगर से सटे मोहब्बतनगर गांव निवासी मुहम्मद शादाब रोहतक में वेल्डिंग का काम करते हैं। उनके छोटे भाई मुहम्मद सोहराब उर्फ आशू और भतीजा जैव भी रोहतक में खाने का होटल चलाते हैं। शुक्रवार रात मुहम्मद शादाब, भाई सोहराब, भतीजा जैव और मामा के बेटे मुहम्मद अजीम के साथ कार से स्वार स्थित अपने घर लौट रहे थे। कार मुहम्मद शादाब चला रहे थे।

स्वजन के अनुसार, इनकी कार जैसे ही दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर डासना के पास पहुंची, वहां घना कोहरा छाया हुआ था। कोहरे के कारण चालक को सामने रास्ता दिखाई नहीं दिया और कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गई। तेज रफ्तार होने के कारण कार कई बार पलटती हुई सड़क किनारे जा गिरी।

हादसे में मुहम्मद सोहराब गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कार में सवार अन्य तीन लोग घायल हो गए। राहगीरों ने कार में फंसे सभी घायलों को बाहर निकाला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने मुहम्मद सोहराब को मृत घोषित कर दिया।

स्वजन ने पुलिस से कार्रवाई न करने की बात कहते हुए शव घर लाने की इच्छा जताई। इसके बाद पुलिस ने शव स्वजन को सौंप दिया। जैसे ही शव मोहब्बतनगर गांव पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। मृतक के घर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया।
शादी की खुशियों में मातम, मासूम बेटे के सिर से उठा पिता का साया

नगर से सटे गांव जलाफ नगला से रविवार को बहन की बरात आनी थी। शादी की खुशियों में शामिल होने के लिए सोहराब घर के लिए निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी होगा। हादसे में सोहराब की जान जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

सोहराब पौने तीन साल के एक मासूम बेटे के पिता थे। पत्नी, माता-पिता और अन्य स्वजन रो-रोकर बेसुध हो गए। जिस घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां मातम पसर गया। स्वजन का कहना है कि पांच बेटों में वह चौथे नंबर के थे। सोहराब परिवार की जिम्मेदारियों का सहारा थे।

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