डिजिटल डेस्क, लखनऊ। कर्तव्य पथ पर उत्तर प्रदेश की झांकी में कालिंजर किले को दर्शाया गया, उसकी ऐतिहासिकता ने प्रदेश को एक नई पहचान दी है। कालिंजर किले पर आधारित यह झांकी प्रदेश की समृद्ध विरासत, बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाई देगी।
उत्तर प्रदेश की यह झांकी आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ने और सांस्कृतिक स्वाभिमान को मजबूत करने का संदेश देती है। झांकी पर कालिंजर दुर्ग के साथ ही ब्रह्मोस तक, परंपरा और प्रगति के अद्भुत संगम का नजारा दिखा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कालिंजर किले का विशेष उल्लेख करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश के किले केवल ईंट और पत्थर नहीं हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं।
उन्होंने बुंदेलखंड के अन्य ऐतिहासिक किलों ग्वालियर, झांसी, दतिया, अजयगढ़, गढ़कुंडार और चंदेरी का उल्लेख करते हुए कहा था कि इन किलों की ऊंची-ऊंची दीवारों से आज भी संस्कार और स्वाभिमान झांकते हैं।
कालिंजर किले की खासियत
- कालिंजर किला प्रदेश के शौर्य, संस्कृति और आत्मगौरव का प्रतीक है।
- यूपी के बांदा जिले में स्थित कालिंजर किला भारत के सबसे प्राचीन और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण किलों में गिना जाता है।
- इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने इस किले पर कई बार आक्रमण किया, लेकिन हर बार उसे असफलता का सामना करना पड़ा।
- ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह दुर्ग सदियों तक अजेय रहा और बुंदेलखंड की शौर्यगाथा का सशक्त प्रतीक बना।
- कालिंजर किले के भीतर स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक पहचान को और सुदृढ़ करता है।
- मंदिर की प्राचीन शिल्पकला और धार्मिक महत्व इसे आस्था का बड़ा केंद्र बनाते हैं।
गणतंत्र दिवस की झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति, शिल्प और आधुनिक उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का भव्य प्रदर्शन होगा। इसमें ओडीओपी, लोकनृत्य और पर्यटन से लेकर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक बुंदेलखंड की संपूर्ण झलक दिखाई गई। |