जिला कारागार वाराणसी
मनोज त्रिपाठी, जागरण, लखनऊः उत्तर प्रदेश के कारागारों में तैनात कर्मियों की सेहत की कमियों को अब प्रयोगशाला में सामने लाया जाएगा। इसके लिए कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय से विकसित प्रयोगशाला को कारागारों में स्थापित कराने की तैयारी कर ली है।
इस प्रयोगशाला में कारागार कर्मियों की सेहत की जांच मात्र कुछ मिनटों में ही कर ली जाएगी। प्रयोगशाला में सुरक्षा कर्मियों की बायोलाजिक आयु सहित, शरीर में चर्बी, पानी, फेफड़ों की स्थिति, भार, प्रोटीन, खनिज पदार्थ व बाडी मास इंडेक्स सहित 20 प्रकार की जानकारी मिलेगी।
सुरक्षा कर्मियों की सेहत की सही जानकारी एकत्र करने लिए राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग तथा पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गुजरात ने लखनऊ के मोहान रोड पर क्षेत्रीय कैंपस स्थापित किया है। इस प्रयोगशाला को विशेष तौर पर सुरक्षा कर्मियों के शरीर के अंदर की सही स्थिति को जानने के लिए विकसित किया गया है। मात्र एक किट बैग में व्यवस्थित इस प्रयोगशाला को ह्यूमन परफारमेंस प्रयोगशाला नाम दिया गया है।
रक्षा विश्वविद्यालय के रीजनल कैंपस की निदेशक डा. मंजरी चंद्रा ने इस बारे में बताया कि इस प्रयोगशाला को विशेष तौर पर सुरक्षा कर्मियों की सेहत की जांच के लिए ही विकसित किया गया है। डीजी कारागार पीसी मीणा ने बताया कि प्रयोगशाला का प्रदर्शन कई कर्मियों के सेहत की जांच करके देख लिया गया है। इस संदर्भ में जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
प्रयोगशाला में इसकी मिलेगी जानकारी
शरीर के अंदर चर्बी कितनी है। शरीर का भार कितना है, कितना होना चाहिए। मास कितना होना चाहिए, कितना है। बाडी फैट कितना होना चाहिए और कितना है। कमर और उसके नीचे के भाग का अनुपात कितना होना चाहिए, कितना है। मांसपेशियों की स्थिति क्या है। शरीर में पानी कितना होना चाहिए, कितना है। प्रोटीन कितना होना चाहिए, कितना है। खनिज कितना होना चाहिए, कितना है। वर्तमान आयु और शरीर की बायोलाजिकल आयु। रोजाना कितनी ऊर्जा खर्च की जा रही है। कितनी चर्बी कम करनी है। फेफड़ों की स्थित कैसी है। |
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