पृथ्वी की जलवायु पर प्रभाव डालता है मंगल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि मंगल ग्रह का पृथ्वी पर कहीं अधिक प्रभाव पड़ता है। मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव और कक्षा को प्रभावित करता है और लाखों वर्षों तक चलने वाले जलवायु चक्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च से ये परिणाम सामने आते हैं कि मंगल ग्रह बृहस्पति जैसे ग्रहों की तुलना में बहुत छोटा होने के बावजूद, लंबे समय तक पृथ्वी की जलवायु को आकार देने में सहायक है। पृथ्वी के मौसम को बदलने में सूर्य और बाकी ग्रहों के साथ ही मंगल की भी अहम भूमिका है।
मंगल ग्रह का पृथ्वी पर प्रभाव
दशकों से, वैज्ञानिक यह समझते आ रहे थे कि पृथ्वी की जलवायु मिलानकोविच चक्रों से प्रभावित होती है। ये चक्र सौर मंडल के अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण पृथ्वी की कक्षा और झुकाव में होने वाले बहुत धीमे परिवर्तन हैं।
पृथ्वी के निकट होने के कारण शुक्र और विशाल आकार के कारण बृहस्पति को इन चक्रों का सबसे महत्वपूर्ण चालक माना जाता रहा। मंगल की भूमिका को भी स्वीकार किया गया था, लेकिन इस नई रिसर्च से पहले अब तक इसका वास्तविक प्रभाव स्पष्ट नहीं था।
गहरे समुद्र की तलछटों पर किए गए पिछले शोधों से यह संकेत मिला था कि मंगल ग्रह पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इस प्रभाव को प्रमाणित नहीं किया गया था।
यह नया सिमुलेशन अध्ययन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवरसाइड के स्टीफन केन ने ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय की पाम वेरवूर्ट और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के जोनाथन हॉर्न के सहयोग से किया।
केन का मानना था कि पृथ्वी पर मंगल ग्रह का प्रभाव बहुत कम होगा और पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में इसे स्पष्ट रूप से देखना लगभग असंभव होगा। इस विचार का परीक्षण करने के लिए उन्होंने यह अध्ययन शुरू किया।
पृथ्वी के जलवायु चक्र पर पड़ता है प्रभाव
मिलानकोविच चक्र, जो प्रमुख चक्रों में से एक है, लगभग 430,000 वर्षों तक चलता है और पृथ्वी की कक्षा के आकार को प्रभावित करता है। यह चक्र मुख्य रूप से शुक्र और बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से संचालित होता है। सिमुलेशन से पता चला कि मंगल की उपस्थिति या अनुपस्थिति इस विशेष चक्र पर कोई फर्क नहीं डालती।
लेकिन जब सिमुलेशन से मंगल को पूरी तरह हटा दिया गया, तो लगभग 100,000 वर्ष और 2.4 मिलियन वर्ष की अवधि वाले दो अन्य महत्वपूर्ण चक्र भी पूरी तरह समाप्त हो गए। केन के अनुसार, मंगल के बिना ये चक्र निरंतर नहीं रह सकते। रिसर्च में यह भी सामने आया कि यदि मंगल का द्रव्यमान बढ़ाया जाता है, तो मंगल का प्रभाव बढ़ने की वजह से ये चक्र और भी छोटे हो जाएंगे।
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