फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, डेयरी और पैकेजिंग सेक्टर में स्थानीय उद्यमियों का बढ़ता निवेश। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पिछले 7–8 वर्षों में गोरखपुर स्टार्टअप आधारित औद्योगिक गतिविधियों का नया केंद्र बनकर उभरा है। वर्ष 2017 के बाद केंद्र और राज्य सरकार की स्टार्टअप इंडिया, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (एमएसएमई) नीति के तहत गोरखपुर में 300 से अधिक स्टार्टअप-आधारित उत्पादन इकाइयां की स्थापना हुई है।
ये इकाइयां मुख्य रूप से गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा), उसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा शहरी क्षेत्र में भी विकसित हुई हैं। वहीं, एमएसएमई पोर्टल पर बकरी पालन, आइसक्रीम, ब्यूटी पार्लर से लघु उद्योगों समेत फैक्ट्री आदि जैसे स्थापित होने वाले छोटे उद्योगों की संख्या तो 24 हजार से भी ज्यादा है। इनमें प्रमुख रूप से 300 इकाइयां हैं।
भारत में राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस हर साल 16 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 में की गई थी। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर में भी स्टार्टअप उद्योगों की काफी बेहतर प्रगति रही है। सहायक आयुक्त उद्योग रोशन अंबेडकर ने बताया कि सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के पोर्टल पर 24 हजार से ज्यादा लोगों ने उद्यम के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, इनमें लघु उद्योगों में बकरी पालन से लेकर मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटी पार्लर, साइबर कैफे, वेल्डिंग, पैक्ड पानी, आरओ प्लांट, आइसक्रीम फैक्ट्री आदि शामिल हैं।
वहीं, लघु व मध्यम उद्योगों में दुग्ध प्रसंस्करण, अनाज और दाल प्रोसेसिंग, फूड पैकेजिंग आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के दौरान गोरखपुर में औद्योगिक तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। लघु व मध्यम श्रेणी की 300 से ज्यादा इकाइयां स्थापित हुई हैं।
गोरखपुर में स्थापित स्टार्टअप इकाइयों में सबसे अधिक भागीदारी फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, पैकेजिंग, प्लास्टिक मोल्डिंग, कृषि आधारित उद्योग और वेयरहाउसिंग सेक्टर की रही है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चा माल और बेहतर कनेक्टिविटी ने नए उद्यमियों को निवेश के लिए आकर्षित किया। स्टार्टअप आधारित इन इकाइयों से 12,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या में स्थानीय युवा, डिप्लोमा और महिला उद्यमी शामिल हैं।
गोरखपुर में स्टार्टअप आधारित औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि शहर अब केवल बड़े उद्योगों पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्थानीय उद्यमिता और नवाचार के दम पर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है। आने वाले वर्षों में यह स्टार्टअप इकोसिस्टम पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने की क्षमता रखता है। इससे गोरखपुर और आसपास के जिलों से होने वाला पलायन भी कम हुआ है।
वर्ष-वार स्टार्टअप इकाइयाें का अनुमान
- 2017–18: लगभग 20 नई स्टार्टअप इकाई, निवेश, 150 करोड़
- 2018–19: 30 इकाई, निवेश 220 करोड़
- 2019–20: 40 इकाई, निवेश 300 करोड़
- 2020–21: 25 इकाई (कोविड के बावजूद), निवेश 180 करोड़
- 2021–22: 55 इकाई, निवेश 450 करोड़
- 2022–23: 60 इकाई, निवेश 520 करोड़
- 2023–24: 70 इकाई, निवेश 600 करोड़
- 2024–25: 45 नई स्टार्टअप इकाई, निवेश 700 करोड़
उद्योग विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार कुल मिलाकर स्टार्टअप आधारित इकाइयों में 3,000 करोड़ से अधिक का निवेश हो चुका है।
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प्रमुख स्टार्टअप इकाइयां
- ज्ञान डेयरी (विस्तार आधारित स्टार्टअप यूनिट)-दुग्ध प्रसंस्करण
- कपिला एग्रो इंडस्ट्रीज-अनाज और दाल प्रोसेसिंग
- टेक्नोप्लास्ट पैकेजिंग (एमएसएमई यूनिट)-प्लास्टिक पैकेजिंग
- गजानन पालीप्लास्ट- प्लास्टिक कंटेनर निर्माण
- ओमफ्लेक्स कंपोनेंट यूनिट- प्लास्टिक प्रोसेसिंग
इनके अलावा दर्जनों छोटे-मझोले स्टार्टअप प्लास्टिक पाइप, बोतल, मसाला पैकिंग, रेडी-टू-ईट फूड और पशु आहार निर्माण में सक्रिय हैं।
प्रमुख महिला स्टार्टअप्स
- शक्ति फूड्स प्रोसेसिंग इकाई-आटा, मसाला और पैकेज्ड फूड
- अन्नपूर्णा डेयरी प्रोडक्ट्स- पनीर, घी और दही उत्पादन
- सखी पैकेजिंग इकाई- फूड ग्रेड पैकिंग मटेरियल
- गोरखपुर महिला अगरबत्ती उद्योग-घरेलू और निर्यात बाजार
- श्री महिला स्वयं सहायता समूह क्लस्टर-रेडी-टू-इट उत्पाद
इनमें से कई इकाइयों की शुरुआत स्वयं सहायता समूहों से हुई, जो आज पूर्ण रूप से पंजीकृत एमएसएमई और स्टार्टअप बन चुकी हैं। |