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अब बन सकेंगे नौ लाख से अधिक गरीब ग्रामीणों के आधे-अधूरे मकान
राज्य ब्यूरो, पटना। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राशि भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत ही राशि भेजने पर सहमति दी है। इसके बाद राज्य सरकार ने अविलंब 4500 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने साफ कह दिया था कि अब भुगतान की नई व्यवस्था (एसएनए-स्पर्श) से ही राशि जारी की जाएगी। बिहार को निर्देश था कि इस व्यवस्था को अपने यहां लागू कर लें।
इसी बीच ग्रामीण विकास विभाग ने आग्रह किया था कि 31 मार्च, 2026 तक के लिए छूट दी जाए, ताकि पुरानी व्यवस्था से ही राशि का भुगतान हो सके। बहरहाल केंद्र सरकार ने यह छूट 31 जनवरी, 2026 तक के लिए ही दी है। अब लगभग नौ लाख से अधिक परिवारों की अपनी छत की आशा पूरी हो सकती है।
पिछले वर्ष 11 दिसंबर को बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिले थे। उसी दौरान उन्होंने चौहान को जानकारी दी थी कि राशि बकाया होने के कारण गरीब ग्रामीणों के आवासों का निर्माण आधा-अधूरा है।
तब उन्होंने 4491 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया था। उल्लेखनीय है कि राशि नहीं मिलने के कारण बिहार में नौ लाख से अधिक घरों का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है।
बिहार का लक्ष्य:
इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए बिहार को कुल 12 लाख 21 हजार 247 आवास बनाने का लक्ष्य मिला था। अब तक मात्र दो लाख 85 हजार आवास ही तैयार हो पाए हैं। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि पिछले पांच माह से केंद्र से कोई राशि नहीं मिली। इसलिए निर्माण की गति बेहद धीमी है।
लंबित है किस्त:
अब तक 11 लाख 35 हजार लोगों को पहली किस्त, सात लाख 47 हजार को दूसरी किस्त और तीन लाख 27 हजार लाभुकों को तीसरी किस्त दी जा चुकी है। तीन लाख 88 हजार लाभुकों को दूसरी और चार लाख 20 हजार लाभुकों को तीसरी किस्त का भुगतान नहीं हो पाया है। राज्य नोडल खाते में योजना मद की राशि नहीं होने से किस्तें जारी नहीं हो पा रही थीं।
भुगतान की नई प्रणाली:
एसएनए-स्पर्श के अंतर्गत राशि भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए सीधे लाभुकों के खातों में भेजी जाएगी। पहले राशि राज्य सरकार के माध्यम से दूसरे बैंक में जाती थी और फिर लाभार्थियों तक पहुंचती थी। बिहार में नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर (एनआइसी) इस भुगतान के इस नए सिस्टम को तैयार कर रहा है। |
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