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रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर बन रहे हैं कई मंगलकारी संयोग, अयोध्या नरेश की बरसेगी विशेष कृपा

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गुरुवार का संबंध गुरु तत्व, ज्ञान और धर्म से माना गया है



दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। सनातन परंपरा में रामलला प्रतिष्ठा दिवस को आस्था, धर्म और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा अत्यंत पावन अवसर माना गया है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में रामलला प्रतिष्ठा दिवस 22 जनवरी (Ram Lalla Pratistha Diwas) को मनाया जाएगा। यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।

  

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन ग्रहों और काल की स्थिति स्वयं शुभ संकेत प्रदान करती है, जिससे अनेक सकारात्मक योगों का निर्माण होता है। माघ मास की पवित्रता, सूर्य की उत्तरायण स्थिति, गुरु तत्व का प्रभाव और सामूहिक भक्ति का भाव ये सभी तत्व मिलकर रामलला प्रतिष्ठा दिवस को विशेष पुण्यदायी बनाते हैं। यही कारण है कि इस अवसर पर बनने वाले योगों को धर्म, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
माघ मास और सूर्य की शुभ स्थिति

रामलला प्रतिष्ठा दिवस (Ayodhya auspicious events) माघ मास में पड़ता है, जिसे सनातन धर्म में पुण्य और तप का महीना माना गया है। इस समय सूर्य देव उत्तरायण रहते हैं, जो स्वयं शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से उत्तरायण सूर्य के प्रभाव में किए गए धार्मिक कार्य अधिक फलदायी माने जाते हैं।

सूर्य की यह स्थिति आत्मबल, तेज और धर्म के मार्ग को सुदृढ़ करती है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में सूर्य का तेज साधक के भीतर आस्था और संयम को मजबूत करता है। इसी कारण रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर सूर्य की शुभ स्थिति को एक विशेष आध्यात्मिक योग के रूप में देखा जाता है, जो समाज में धर्म और सद्भाव का संचार करता है।
रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर बनने वाले शुभ योग

वर्ष 2026 में रामलला प्रतिष्ठा दिवस का गुरुवार को पड़ना इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है। गुरुवार का संबंध गुरु तत्व, ज्ञान और धर्म से माना गया है, और शास्त्रों के अनुसार जब गुरु तत्व किसी पावन तिथि से जुड़ता है, तो वह दिन भक्ति, मर्यादा और सद्बुद्धि को प्रबल करने वाला बन जाता है। रामलला स्वयं मर्यादा और धर्म के प्रतीक हैं, इसलिए यह संयोग इस दिवस की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाता है।

यह तिथि विक्रम संवत 2080 के अनुसार भी अत्यंत शुभ मानी गई, जिससे इस ऐतिहासिक क्षण की दिव्यता और व्यापक हो गई। साथ ही यह दिन मकर संक्रांति के बाद आया, जब सूर्य उत्तरायण होते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन और प्रकाश व सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि का काल माना गया है। गुरु तत्व, उत्तरायण सूर्य और शुभ संवत इन सभी योगों के संयोग ने रामलला प्रतिष्ठा दिवस को आस्था, धर्म और शुभता से परिपूर्ण अत्यंत पावन अवसर बना दिया।
सामूहिक भक्ति से बनने वाला शुभ योग

रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर देश भर में सामूहिक पूजा, राम नाम जप और भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ धर्म कर्म करते हैं, तो एक विशेष सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इस सामूहिक भक्ति को भी एक प्रकार का शुभ योग माना गया है।

यह योग व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे समाज पर शुभ प्रभाव डालता है। इस दिन मंदिरों में दीपों का जलना, भजन और राम कथा का आयोजन वातावरण को पवित्र बनाता है। ऐसी सामूहिक साधना से धर्म, एकता और सद्भाव की भावना प्रबल होती है, जो इस दिवस को और अधिक पुण्यदायी (divine blessings festival) बनाती है।

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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
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