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अदालत ने कहा यदि प्रमोटर ऐसा करने में विफल रहता है तो आवंटी राहत या मुआवजे के लिए स्वतंत्र होंगे।
जेएनएफ, जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय जम्मू ने रायल ओंकार नेस्ट्स प्राइवेट लिमिटेड पर लगाए गए यथास्थिति आदेश को निरस्त कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब जम्मू-कश्मीर विशेष न्यायाधिकरण के एकल पीठ के अध्यक्ष ने अपील को उचित पीठ के गठन के अभाव में गैर-परिसंविदनीय मानते हुए कहा कि उसके बाद किसी भी प्रकार का प्रतिबंधात्मक आदेश जारी रखना न्यायसंगत नहीं था।
यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल भारती ने रायल ओंकार नेस्ट्स प्राइवेट लिमिटेड व एक अन्य की ओर से संदीप कुमार व अन्य के विरुद्ध दायर याचिका पर पारित किया।याचिकाकर्ता जम्मू के दिल्ली कुंजवानी बाइपास क्षेत्र में स्थित रियल एस्टेट परियोजना रायल नेस्ट सैफायर के प्रमोटर हैं।
निर्णय में उल्लेख किया गया है कि 14 फ्लैट धारकों ने रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत जम्मू-कश्मीर रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दायर की थी।
इस शिकायत का निपटारा प्राधिकरण ने 2 जुलाई 2025 को करते हुए निर्देश दिया था कि खामियों को लिखित रूप में बताया जाए और 30 दिनों के भीतर उनका निवारण किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि प्रमोटर ऐसा करने में विफल रहता है तो आवंटी राहत या मुआवजे के लिए स्वतंत्र होंगे।
इस आदेश से असंतुष्ट होकर आवंटियों ने जम्मू-कश्मीर विशेष न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर की। 22 सितंबर 2025 को न्यायाधिकरण की एकल-सदस्यीय पीठ (अध्यक्ष) ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और प्रमोटर को साझा क्षेत्रों को व्यावसायिक उपयोग में बदलने या ऐसे किसी क्षेत्र का संचालन या हस्तांतरण करने से रोक दिया।
वहीं अदालत ने ने साझा क्षेत्रों से संबंधित यथास्थिति आदेश को रद्द कर दिया, जबकि आदेश के शेष हिस्से को यथावत रखते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। |
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