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खतौनी की गलतियों से अब नहीं कटेगा कचहरी का चक्कर, गांव की चौपाल पर ही ठीक हो जाएंगे जमीन के कागज़; जानें कैसे?

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प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



संवाद सहयोगी, जागरण, बहजोई (संभल)। किसी भी किसान के पास अपनी भूमि की सुरक्षित अधिकार के लिए उसके पास खतौनी होती है। अगर उसमें भी त्रुटि हो जाए या अंश निर्धारण गलत हो जाए या फिर उसके तथ्यों को भी लोप कर दिया जाए तो आम तौर पर लेखपाल से लेकर एसडीएम तक और उनके न्यायालय तक किस चक्कर काटते नहीं थकता लेकिन किसानों के लिए राहत देने वाली खबर है।

जिन किसानों की खतौनी अर्थात राजस्व अभिलेखों में अंश निर्धारण, नाम, तृतीय या अन्य विवरण गलत तरीके से दर्ज हो गए थे और जिन्हें अब तक एसडीएम न्यायालय से लेकर विभिन्न अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे थे, उन्हें अब न्यायालय नहीं जाना होगा। सरकार की ओर से भूलेख खतौनी अंश त्रुटि सुधार नामक एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया गया है।

इसके माध्यम से संशोधन की पूरी प्रक्रिया आनलाइन की जाएगी और किसान सीधे अपने गांव में ही लेखपाल के सामने आवेदन कर सकेंगे।भूलेख अनुभाग की ओर से बताया गया है कि इस पोर्टल के संचालन के लिए अब लेखपालों को भी यूजर आइडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं।

यह प्रणाली पूरी तरह डिजिटल है, जिसमें लेखपाल से लेकर राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और एसडीएम स्तर तक यूजर आइडी के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की गई है। खास बात यह है कि जनपद में दो माह तक चलने वाले एक विशेष अभियान के अंतर्गत किसानों के अभिलेखों में अंश निर्धारण, तृतीय और अन्य त्रुटियों को ठीक किया जाएगा।

यह अभियान 10 जनवरी से शुरू हो चुका है और 15 मार्च तक चलेगा, जिसे कुल छह चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रारंभिक स्थिति यह है कि 11 जनवरी तक जनपद में कुल 16,231 आवेदन अंश निर्धारण और त्रुटि संशोधन से संबंधित प्राप्त हुए, जिन्हें ठीक किया जा चुका है। पहले सात दिन यानी 16 जनवरी तक लेखपाल भूमि प्रबंधन समिति के माध्यम से ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों में व्यापक प्रचार प्रसार करेंगे।

ताकि जिन किसानों की खतौनी में कोई त्रुटि, लोप या गलत अंश दर्ज है, वे आगे आ सकें। इसके बाद अगले 15 दिन तक अर्थात 17 से 31 जनवरी तक गांवों में बैठकें होंगी, जहां लेखपाल द्वारा राजस्व अभिलेख और खतौनियां पढ़कर सुनाई जाएंगी और मौके पर ही आवेदन आनलाइन दर्ज किए जाएंगे।

इसके बाद एक फरवरी से 15 फरवरी तक लेखपाल स्तर पर जांच की जाएगी, फिर 16 से 26 फरवरी से 10 दिन में राजस्व निरीक्षक द्वारा परीक्षण किया जाएगा। 27 फरवरी से पांच मार्च तक सात दिन में तहसीलदार स्तर पर जांच और अंतिम तीन दिन में भूलेख व खतौनी में संशोधन दर्ज कर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

  


यह अभियान पूरी तरह किसान हित में है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान को छोटी सी राजस्व त्रुटि के लिए न्यायालय के चक्कर न लगाने पड़ें। सभी लेखपालों को रोस्टर के अनुसार गांवों में जाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं और तय समय सीमा के भीतर सभी सही प्रकरणों का निस्तारण कराया जाएगा, ताकि किसानों के अभिलेख शुद्ध, पारदर्शी और अपडेट रह सकें।

- डा. राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल।





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