search

ताइवान ने OnePlus के CEO पीट लाउ के खिलाफ जारी किया अरेस्ट वारंट, ये है वजह

LHC0088 1 hour(s) ago views 474
  

OnePlus CEO के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया है। Photo- Reuters.



टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। ताइवान के अधिकारियों ने वनप्लस के CEO पीट लाउ ( OnePlus CEO Pete Lau) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उन पर आरोप है कि चीन के इस स्मार्टफोन ब्रांड ने क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों को नियंत्रित करने वाले स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से ताइवानी कर्मचारियों को नौकरी पर रखा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिलिन डिस्ट्रिक्ट प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने पुष्टि की है कि लाउ को एक बड़ी जांच के हिस्से के रूप में वांटेड घोषित किया गया है। ये जांच इस आरोप पर आधारित है कि वनप्लस ने ताइवान से 70 से ज्यादा इंजीनियरों को गैर-कानूनी तरीके से भर्ती किया था। प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक, दो ताइवानी नागरिकों पर भी आरोप तय किए गए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर भर्ती प्रक्रिया में लाउ की मदद की थी।
मामला क्या है?

इस मामले की जड़ में ताइवान के क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट को दरकिनार करने की कथित कोशिश है। ये कानून ताइवान और मेनलैंड चीन के बीच आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों को कंट्रोल करता है। इस कानून के तहत, चीनी कंपनियों को स्थानीय कर्मचारियों को काम पर रखने या द्वीप पर कुछ बिजनेस एक्टिविटी करने से पहले ताइवानी सरकार से स्पष्ट मंजूरी लेनी होती है।

प्रॉसिक्यूटर का दावा है कि वनप्लस ने हांगकांग में एक अलग नाम से एक शेल कंपनी बनाई, जिसका इस्तेमाल 2015 में ताइवान में एक बिना मंजूरी वाली ब्रांच स्थापित करने के लिए किया गया। आरोप है कि ये ब्रांच बिना किसी रेगुलेटरी मंजूरी के काम कर रही था और वनप्लस स्मार्टफोन के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट के काम पर फोकस्ड था। ताइवानी अधिकारियों का तर्क है कि इस स्ट्रक्चर को जानबूझकर कंपनी के मेनलैंड चीनी स्वामित्व को छिपाने और कानूनी जांच से बचने के लिए डिजाइन किया गया था।

  

क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट अनऑथराइज्ड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को रोकने और ताइवान की स्ट्रैटेजिक इंडस्ट्रीज, खासतौर पर इसके सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग टैलेंट की रक्षा के लिए मौजूद है। अधिकारियों का मानना है कि वनप्लस की कथित कार्रवाइयों ने बिना किसी निगरानी के स्किल्ड इंजीनियरों को चुपचाप अपने R&D पाइपलाइन में शामिल करके इन सुरक्षा उपायों को कमजोर किया।

फिलहाल, वनप्लस ने गिरफ्तारी वारंट पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ये मामला इस बात पर फिर से ध्यान दिलाता है कि चीनी टेक कंपनियां ताइवान में कैसे काम करती हैं और कुछ फर्म्स अपने बेहद कुशल कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए किस हद तक जा सकती हैं। हाल के सालों में ताइवान ने उन चीजों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है जिन्हें वह मेनलैंड की कंपनियों द्वारा गुपचुप तरीके से की जाने वाली भर्ती मानता है, खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में।
लाउ का क्या होगा?

लाउ के लिए अरेस्ट वारंट का मतलब ये नहीं है कि उन्हें तुरंत प्रत्यर्पित किया जाएगा। ताइवान का चीन के साथ कोई औपचारिक प्रत्यर्पण संधि नहीं है, और जब तक लाउ ताइवानी अधिकार क्षेत्र या किसी सहयोगी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते, तब तक उनके गिरफ्तार होने की संभावना नहीं है। फिर भी, इस कदम का प्रतीकात्मक महत्व है और ये वनप्लस के अंतरराष्ट्रीय संचालन, साझेदारी और प्रतिष्ठा को जटिल बना सकता है।

यह भी पढ़ें: Android यूजर्स जरूर अपडेट कर लें अपना फोन, सरकारी एजेंसी ने किया अलर्ट; हो सकता है अटैक
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
150503

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com