राज्य ब्यूरो, लखनऊ। टीबी बीमारी की आशंका वाले सभी लोगों का चेस्ट एक्स-रे किया जाएगा। ऐसे लोगों में टीबी के लक्षण नहीं मिलते हैं, लेकिन भविष्य में इन्हें बीमारी होने की आशंका होती है। स्वास्थ्य विभाग ने डायबिटीज, धूम्रपान करने वाले, टीबी मरीज के साथ रहने वाले, एचआईवी पाजिटिव लोगों सहित 10 श्रेणियां तय की हैं, जो टीबी बीमारी होने की आशंका की उच्च जोखिम श्रेणी में आती हैं।
इस श्रेणी में आने वाले सभी लोगों का एक्स-रे करने और जानकारी नि:क्षय पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डा़ रतन पाल सिंह सुमन ने दिए हैं। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (सीएमएस) को इस संबंध में पत्र भी लिखा है।
महानिदेशक ने निर्देश दिया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), जिला अस्पतालों, मेडिकल कालेजों की ओपीडी में बड़ी संख्या में टीबी की उच्च जोखिम श्रेणी वाले इलाज के लिए आते हैं। ऐसे लोगों की जानकारी पंजीकरण के समय ही फोन नंबर व पते सहित दर्ज की जाए।
पर्चे पर लाल सितारे जैसी मोहर लगाकर चिकित्सा अधिकारी के पास भेजा जाए, जिससे वह उस व्यक्ति को चेस्ट एक्स-रे के लिए रेफर कर सकें। इससे उच्च जोखिम श्रेणी के शत-प्रतिशत लोगों का एक्स-रे हो सकेगा।
उन्होंने अस्पतालों की ओपीडी में उच्च जोखिम श्रेणी व टीबी के लक्षणों की जानकारी का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश राज्य क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी को दिए हैं। उन्होंने गैर संक्रामक बीमारियों (एनसीडी) जैसे कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और बाल रोग विभाग, वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग, डायलिसिस यूनिट में आने वाले मरीजों का चेस्ट एक्स-रे कराए न जाने पर भी चिंता जताई है।
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) कार्यक्रम से जुड़े कर्मचारियों वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्ष, वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक, टीबी-एचआईवी पर्यवेक्षक से नि:क्षय पोर्टल पर सभी जानकारी दर्ज कराने के लिए कहा है।
उच्च जोखिम श्रेणी में आने वाले अन्य व्यक्ति
मलिन बस्तियों में रहने वाले, वृद्धाश्रम में रहने वाले, निर्माणाधीन भवन, ईंट भट्टे पर कार्य करने वाले, जेल के बंदी, कुपोषित जनसंख्या जिनका बाडी मास इंडेक्स 18.5, शराब व अन्य नशा करने वाले, 60 साल से अधिक उम्र के लोग |