प्लेटफार्म पर चल रहा मरम्मत कार्य। (जागरण)
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जयनगर–हावड़ा एक्सप्रेस में हुए हादसे के बाद समस्तीपुर रेल मंडल पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। घटना के दूसरे दिन मंगलवार को रेलवे प्रशासन ने पूरे मंडल में विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया।
सभी स्टेशनों पर प्लेटफार्म और रेलवे ट्रैक के आसपास रखी निर्माण सामग्री की सघन जांच की गई। समस्तीपुर जंक्शन पर सोमवार की देर रात एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया।
जयनगर से हावड़ा जा रही 13032 एक्सप्रेस ट्रेन के एक कोच में प्लेटफार्म पर रखा लोहे का पाइप फंस गया, जिससे ट्रेन में सवार 56 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। गनीमत रही कि समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
घोर लापरवाही आई सामने
प्राथमिक जांच में इस घटना के लिए संवेदक की घोर लापरवाही सामने आई है। मामले में कैरिज एंड वैगन विभाग के सीनियर सेक्शन इंजीनियर जयकांत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कार्य एजेंसी तुलसी कंस्ट्रक्शन पर जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की राशि इस घटना से हुए नुकसान के आकलन के बाद तय की जाएगी।
साथ ही रेलवे प्रशासन इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी में भी जुट गया है। यदि कंपनी ब्लैकलिस्ट होती है तो वह समस्तीपुर मंडल में भविष्य में किसी भी प्रकार का ठेकेदारी कार्य नहीं कर सकेगी।
घटना को लेकर डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। कैरिज एंड वैगन विभाग के जिस सीनियर सेक्शन इंजीनियर की जिम्मेदारी निगरानी की थी, उन्हें निलंबित किया गया है। साथ ही संवेदक कंपनी पर फाइन लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए रेलवे प्रशासन गंभीर है। इस संबंध में बुधवार को मंडल स्तर पर एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश
बैठक में सभी स्टेशनों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जांच कर रिपोर्ट दें कि कहीं प्लेटफार्म या रेलवे लाइन के पास कोई ऐसी वस्तु तो नहीं रखी गई है, जिससे ट्रेन संचालन में खतरा पैदा हो सकता है। यदि कहीं निर्माण सामग्री या अन्य सामान रेलवे ट्रैक के पास पाया जाता है तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर रखने का आदेश दिया गया है।
इधर, इस मामले को रेलवे बोर्ड ने भी गंभीरता से लिया है। रेलवे बोर्ड द्वारा मंडल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की गई थी। इसके अनुपालन में मंगलवार की शाम मंडल प्रशासन की ओर से रेलवे बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई। रिपोर्ट में पूरी घटना का विवरण, उसके बाद की गई कार्रवाई, संवेदक की लापरवाही तथा निगरानी अधिकारी द्वारा क्रॉस चेकिंग में बरती गई उदासीनता का उल्लेख किया गया है।
बताया गया कि स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर मुजफ्फरपुर की ओर स्थित वाटरिंग प्लांट में उपयोग के लिए आठ इंच व्यास और 20 फीट लंबे लोहे के कुल 40 पाइप रखे गए थे। इन पाइपों को प्लेटफार्म के पास बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के रखा गया था। न तो इन्हें बांधा गया था और न ही किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई थी।
कैरिज एंड वैगन विभाग के सीनियर सेक्शन इंजीनियर जयकांत कुमार ने भी ठेकेदार पर भरोसा करते हुए सुरक्षा मानकों की सही तरीके से क्रॉस चेकिंग नहीं की। इसका नतीजा यह हुआ कि जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची, ट्रेन के कंपन से एक पाइप लुढ़क कर बोगी और प्लेटफार्म के बीच जाकर फंस गया।
जानकारी के अनुसार, इन पाइपों का उपयोग ट्रेन की बोगियों में पानी भरने के लिए रेलवे लाइन के किनारे लगाए जाने वाले सप्लाई वाटर सिस्टम में किया जाना था। पुराने और खराब पाइपों को बदलकर नए पाइप लगाए जाने थे। इसी कार्य को शुरू करने के लिए सोमवार रात लोहे के पाइप प्लेटफार्म पर उतारे गए थे, ताकि मंगलवार सुबह से काम शुरू किया जा सके।
इस हादसे में प्लेटफार्म को भी काफी नुकसान पहुंचा। करीब 140 मीटर क्षेत्र में कई जगहों पर प्लेटफार्म की टाइल्स टूट गईं और सीमेंट उखड़ गया। मंगलवार को क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करा ली गई है।
सोमवार रात घटी थी घटना
दरअसल, सोमवार रात करीब 11 बजे जैसे ही 13032 जयनगर-हावड़ा एक्सप्रेस समस्तीपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर पहुंची, तभी 20 फीट लंबा एक पाइप रेलवे ट्रैक की ओर लुढ़कने लगा और ट्रेन की एक बोगी से जाकर फंस गया।
कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन रेलवे कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने सभी संवेदकों और संबंधित विभागों को सख्त चेतावनी दी है कि भविष्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई तय है।
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