हेमराज कश्यप, चित्रकूट। Chitrakoot Treasury Scam: यूपी में एक ऐसा घोटाला जो अधिकारियों की मिलीभगत से सात साल तक चलता रहा। करोड़ों रुपये इधर से उधर किए गए। खुलासा हुआ तो अधिकारी से लेकर कर्मचारी, दलाल और पेंशनर्स तक इसमें शामिल थे। कई खातों को सीज कर दिया गया। कई सलाखें के पीछे भेजे गए। लेकिन अभी तक घोटाले के करोड़ों रुपये का पता नहीं लग सका।
चित्रकूट कोषागार विभाग में वर्ष 2018 से 2025 के बीच फर्जी भुगतान आदेशों के जरिए 93 पेंशनरों के बैंक खातों में करीब 43.13 करोड़ रुपये भेजे गए। इन खातों में चार ऐसे थे जो मृत पेंशनरों के नाम पर दोबारा खोले गए थे, जबकि एक खाता राजेंद्र कुमार नामक व्यक्ति के नाम से संचालित हुआ, जिसका कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं मिला। 17 अक्टूबर को वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने पटल सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव, अशोक कुमार, सहायक कोषाधिकारी विकास सचान, सेवानिवृत्त सहायक कोषाधिकारी अवधेश प्रताप सिंह सहित 97 खाताधारकों के खिलाफ कर्वी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अब तक ये कार्रवाई
आरोपित संदीप श्रीवास्तव की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। पुलिस ने अब तक 24 पेंशनर और 8 दलाल व बिचौलिया सहित 35 आरोपितों जेल भेज चुकी है जिसमें कोषागार कर्मी एटीओ विकास सचान और पटल सहायक अशोक वर्मा भी शामिल हैं। जबकि 3.98 करोड़ रुपये की अभी तक रिकवरी हुई है। एक आरोपित जोगवा की अंतरिम जमानत हो चुकी है।
इस तरह से हुआ खुलासा
10 सितंबर को नेवरा थाना मऊ निवासी जगतराम तिवारी की शिकायत से यह मामला सामने आया। उन्होंने बताया कि उनके खाते में बिना किसी जानकारी के 45 लाख रुपये ट्रेजरी से ट्रांसफर हुए। इसी तरह, खंडेला निवासी कमला देवी के खाते में भी 31 लाख रुपये आए थे। जो उसके भाई ने निकाली है, जिसकी तहरीर उसने थाने में दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि करीब 50 करोड़ रुपये की राशि सेवानिवृत्त शिक्षकों के खातों में पेंशन के अलावा अतिरिक्त रूप से ट्रांसफर की गई, जिसे बाद में निकाल लिया गया। आशंका जताई जा रही है कि यह राशि 100 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है।
95 बैंक खाते सीज
आडिट में पाया गया कि 2023 से अब तक 95 रिटायर्ड शिक्षकों के खातों में नियमित रूप से 5 से 50 लाख रुपये तक की रकम ट्रेजरी से भेजी गई। भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक और आर्यावर्त बैंक के 94 खातों को सीज किया गया है।
तीन खातों में 10 करोड़ से अधिक की निकासी
तीन खातों में करीब 10 करोड़ रुपये की निकासी की गई है। एसआइटी की जांच में कई नाम सामने आए हैं। पेंशनर शिव प्रसाद के खाते में सर्वाधिक तीन करोड़ 97 लाख 78 हजार 840 रुपये भेजे गए। इसी तरह रामखेलावन के खाते में तीन करोड़ 59 लाख 32 हजार 457, राजेंद्र कुमार के खाते में तीन करोड़ 45 लाख 14 हजार 395, गिरिजेश के खाते में दो करोड़ 20 लाख 80 हजार 725, धनपति देवी के खाते में एक करोड़ 25 लाख 25 हजार 125, लक्ष्मी देवी के खाते में एक करोड़ 21 लाख 17 हजार 355, मोहनलाल के खाते में एक करोड़ 14 लाख 81 हजार 213, सुशीला देवी के खाते में एक करोड़ 84 लाख 77 हजार 232 की धनराशि भेजने के साथ ही निकाले जाने की पुष्टि हुई है।
ये था कमीशन
खाताधारक को 10 और बिचौलिया को 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। कोषागार से धनराशि भेजने के 24 घंटे से 48 घंटे के बीच रकम निकल ली जाती थी। कुछ खाते ऐसे भी थे जिनमें खाताधारक मौत हो चुकी थी, परंतु विभागीय पक्ष द्वारा वह खाते सक्रिय रखे गए और उनमें लेनदेन किया गया। सिंडिकेट ने रणनीति के तहत सेवानिवृत्त शिक्षकों या ऐसे खाताधारकों को निशाना बनाया, जो तकनीकी जानकार नहीं थे। ऐसे बुजुर्ग खाताधारक बैंक स्टेटमेंट या लेनदेन की नियमित निगरानी नहीं करते थे। उनके नाम से खाते संचालित करना आसान था। अक्सर रिश्तेदार या नज़दीकी व्यक्ति ही उनके खाते का संचालन करते थे। उदाहरण स्वरूप खंडेहा की 70 वर्षीय कमला देवी का खाता उसके भाई द्वारा संचालित किया जाता था, और उसी खाते से लाखों की निकासी हुई।
गबन काल में तीन वरिष्ठ कोषागार अधिकारियों का रहा कार्यकाल
धनराशि गबन की जांच वित्तीय वर्ष 2017-18 से की जा रही है। इस अवधि में तीन वरिष्ठ कोषाधिकारी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। छह दिसंबर 2014 से 21 सितंबर 2019 तक कमलेश कुमार, 21 सितंबर 2019 से सात अगस्त 2023 तक शैलेश कुमार वरिष्ठ कोषाधिकारी रहे हैं। आठ अगस्त 2023 से रमेश सिंह जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। कोषागार से भेजी जाने वाली धनराशि की पत्रावली में सहायक कोषाधिकारी के अलावा वरिष्ठ कोषाधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं। इनके हस्ताक्षर के बगैर एक पैसा कोषागार से आहरित नहीं किया जा सकता। लेकिन यह सभी जिम्मेदार सिर्फ दस्तखत ही बनाते रहे और सिंडिकेट बेधड़क खेल करता रहा।
इस तरह से जानें
- 26 सितंबर 2025 को घोटाले की सुगबुगाहट
- 15 दिन बाद ही यह घोटाला उजागर हुआ।
- 17 अक्टूबर को वरिष्ठ कोषाधिकारी ने संबंधित खाताधारकों व चार कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
- एसआईटी ने जांच शुरू की
- ईडी ने घोटाले से संबंधित फाइलों की जांच की
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