यहां जानें Symbian OS की कहानी।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। Symbian OS की जड़ें Psion के EPOC ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी हैं, जिसे मूल रूप से 1990 के दशक में पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट (PDA) के लिए डेवलप किया गया था। 1998 में, Psion ने मेजर हैंडसेट मेकर्स- Nokia, Ericsson और Motorola के साथ मिलकर सिम्बियन लिमिटेड बनाया। गोल एकदम साफ था: लिमिटेड बैटरी, मेमोरी और प्रोसेसिंग पावर वाले मोबाइल डिवाइस के लिए एक स्टैंडर्डाइज्ड और एफिशिएंट ऑपरेटिंग सिस्टम बनाना।
ऐसे समय में जब फोन बेसिक कॉलिंग डिवाइस से \“स्मार्ट\“ टूल में बदल रहे थे, सिम्बियन को मल्टीटास्किंग, टेलीफोनी, मैसेजिंग और एप्लिकेशन को एफिशिएंट तरीके से संभालने के लिए इंजीनियर किया गया था। ये सब स्मार्टफोन के मेनस्ट्रीम बनने से बहुत पहले की बात है।
Nokia का Symbian पर रणनीतिक दांव
नोकिया जल्दी ही सिम्बियन का सबसे कमिटेड सपोर्टर बनकर उभरा। जहां कंपीटीटर्स प्रोप्रायटरी या फ्रैग्मेंटेड प्लेटफॉर्म के साथ एक्सपेरिमेंट कर रहे थे, नोकिया ने अपने स्मार्टफोन रोडमैप को सिम्बियन के आसपास स्टैंडर्डाइज्ड किया। इससे कंपनी को तेजी से आगे बढ़ने, डेवलपमेंट कॉस्ट कम करने और अलग-अलग प्राइस सेगमेंट में कई तरह के डिवाइस रिलीज करने में मदद मिली।
सिम्बियन के मॉड्यूलर आर्किटेक्चर ने Nokia को Series 60 (S60) जैसे यूजर इंटरफेस को कस्टमाइज करने में सक्षम बनाया, जिससे फोन पावरफुल और एक्सेसिबल दोनों बन गए। कैपेबिलिटी और यूसेबिलिटी का यह संतुलन स्मार्टफोन को खास बिजनेस यूजर्स से मास मार्केट में एक्सपांड करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
नोकिया ने 2008 में सिम्बियन लिमिटेड को खरीद लिया, जिससे वह सिम्बियन OS का प्राइमरी ओनर और डेवलपर बन गया और इसे सिम्बियन फाउंडेशन द्वारा मैनेज किए जाने वाले एक ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म में बदल दिया।
स्मार्टफोन क्रांति (2003–2009)
2003 और 2009 के बीच, सिम्बियन दुनिया का सबसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया। नोकिया ने N-Series और E-Series जैसे आइकॉनिक डिवाइस के साथ इस युग पर राज किया। ये मोबाइल ईमेल, मल्टीमीडिया प्लेबैक, GPS नेविगेशन और थर्ड-पार्टी एप जैसी फीचर्स ऑफर करते थे और ये कई कंपीटीटर्स से कई साल आगे थे।
अपनी पीक पर, सिम्बियन दुनिया के 60% से ज्यादा स्मार्टफोन को पावर करता था। सिम्बियन के सपोर्ट से, Nokia निर्विवाद रूप से \“फोन किंग\“ बन गया, जिसने यूरोप, एशिया और उभरते बाजारों में बड़े पैमाने पर मार्केट शेयर हासिल की। गौर करने वाली बात ये थी कि सिम्बियन डिवाइस धीमे नेटवर्क और सामान्य हार्डवेयर पर भी अच्छा काम करते थे, जिससे नोकिया को ग्लोबली पर एक बड़ा फायदा मिला।
सिम्बियन की ताकत यानी एफिशिएंसी, स्टेबिलिटी और डीप टेलीफोनी इंटीग्रेशन ने नोकिया को प्री-टचस्क्रीन एरा में हावी बनाया। हालांकि, इसकी कॉम्प्लेक्सिटी ने तेजी से इनोवेशन करना मुश्किल बना दिया। जब Apple के iOS और Google के Android ने टच-फर्स्ट डिजाइन और मॉडर्न डेवलपर इकोसिस्टम पेश किए, तो Symbian को बदलने में मुश्किल हुई।
मॉडर्न बनने की कई कोशिशों के बावजूद, Symbian बदलाव की रफ्तार से तालमेल नहीं बिठा पाया। Symbian OS को 2014 में आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया, जब 2011 में नोकिया ने Windows फोन पर फोकस करने की घोषणा की। Nokia का आखिरकार Symbian से दूर जाना एक युग का अंत था।
विरासत
Symbian OS ने सिर्फ फोन को ही पावर नहीं दी, बल्कि इसने Nokia को एक दशक तक मोबाइल कंप्यूटिंग को परिभाषित करने में भी मदद की। इसने आज की स्मार्टफोन इंडस्ट्री की नींव रखी और ये आज भी मोबाइल इतिहास के सबसे प्रभावशाली ऑपरेटिंग सिस्टम में से एक तौर पर याद किया जाता है।
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